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साल के अंत तक शुरू होंगी 400 नल-जल योजनाएं

जनजातियों पर खर्च होंगे सवा तीन अरब
राष्ट्र चंडिका भोपाल । कमलनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना नल-जल इस साल के अंत तक प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य और विशेष कमजोर माने जाने वाले जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचेगी। प्रदेश सरकार पेयजल की समस्या का निराकरण करने के लिए इसी वर्ष के अंत तक 400 नल-जल योजनाएं शुरू करने जा रही है। इन योजनाओं पर राज्य सरकार 3 अरब 26 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च करने जा रही है। निर्धारित लक्ष्य में से अभी पचास प्रतिशत योजनाओं की शुरूआत प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग ने की है। शेष योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया चल रही है। आदिवासी बाहुल्य बसाहटों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह पीवीटीजी के लिए पेयजल की व्यवस्था केंद्रीय सहायता एवं पीवीटीजी मद से मिलने वाली राशि से की जा ही है। केंद्र सरकार द्वारा विशेष चिन्हित क्षेत्रों की पेयजल समस्या के समाधान के लिए योजना शुरू करने की सहमति दिए जाने के उपरांत मप्र के लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग ने इसकी कार्ययोजना बनाना शुरू कर दी है।
2011 की जनगणना को बनाया आधार
विभाग के प्रस्ताव के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानकर 150 से 250 का विशेष जनजातीय जनसंख्या की बसाहटों मेें यह नल-जल योजनाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए सिंगल फेस मोटर पंप आधारित लघु नल-जल योजनाओं का क्रियान्वयन का घरेलू कनेक्शन के माध्यम से पेयजल प्रदाय का कार्य किया जाएगा। पूरे प्रदेशभर में वर्ष 2019 के अंत तक 400 नल-जल योजनाएं शुरू करने का लक्ष्य है।
इन जिलों में शुरू होगी परियोजनाएं
छिंदवाड़ा, बैतूल, हरदा, बड़वानी, खरगौन, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, शहडोल, सिंगरौली, श्योपुर आदि जिलों में विशेष रूप से कमजोर जनजातियों भारिया, सहरिया, बैगा आदि अन्य विशेष कमजोर जनजातियों के मजरे टोलों और गांवों में यह नल जल योजनाएं शुरू होगी। नल जल योजनाओं को शुरू कर इनका संचालन पंचायतों को सौंपा जाएगा। इस योजना से प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों व पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित टप्पों के मजरो, टोलो, वन क्षेत्रों में निवासरत और समाज की मुख्यधारा से विशेष रूप से पिछड़े हुए आदिवासी समाज को मिलेगा। जिससे उनकी पेयजल समस्या से निजात होने से स्वास्थ्य इंडेक्स में भी सुधार होगा।
216 योजनाओं का काम बाकी
अभी इन योजनाओं में से लगभग आधी योजनाएं 216 शुरू ही नहीं हो पाई हैं। इनकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होकर स्वीकृति के लिए भेजी गई हैं जबकि जो योजनाएं शुरू हो गई हैं वे दो महीने के अंदर पूरी हो जाएंगी। योजनाओं का फायदा एक खास समूह के बड़ी संख्या में निवासरत आदिवासियों को मिलेगा।

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