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सिवनी बना सट्टे मटके के मामले में मिनी महाराष्ट्र

*सीसीटीवी कैमरे से रख रहे हैं अपने अवैध धंधों पर नजर*
*खुलेआम खेला जाता है सट्टा प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम चल रहा है नम्बरों का काला खेल*

राष्ट्र चंडिका सिवनी ।  सिवनी बना मिनी महाराष्ट्र महाराष्ट्र की तर्ज पर सिवनी में जगह-जगह सट्टा मटका के नंबर खोले जा रहे है इतना ही नहीं इंटरनेट पर चल रहे सट्टा मटका डॉट कॉम में (कुछ शुल्क देकर)अपने खेल का रिजल्ट देकर यह यह अवैध सट्टे के गेम को बाहर का खेल बता कर सिवनी से ही सट्टा मटके का नंबर खोल रहे हैं बताया जाता है कि सिवनी में चार नामों से सट्टे का मटका चलाया जा रहा है जिसमें  डे और नागपुर दिन और रात के नाम से सिवनी से ही सट्टे का नंबर खोला जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कई ऐसे सफेदपोश लोग भी इनके काले कारनामों में इन सट्टेबाजों का साथ देते हैं। और तो और कुछ सट्टेबाज राजनीतिक दलों से भी जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि अभी तो एक दो ही सट्टेबाज सिवनी  से ही सुबह शाम सट्टा मटका का नंबर खोल रहे हैं और बकायदा इंटरनेट पर चल रहे सट्टा मटका डॉट कॉम( कुछ शुल्क देकर) में इसका रिजल्ट समय पर दे रहे हैं ।जिन्हें पुलिस प्रशासन का कोई डर नहीं है इसी के चलते वह अपने इस खेल को खुलेआम चला रहे हैं।
शहर में इन दिनों खुलेआम चल रहे सट्टा कारोबार पर अंकुश न लगने से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। समाज में जुआ सट्टा कोई नई बात नहीं है। पहले चंद लोग इसमें लिप्त हुआ करते थे, जल्द धनवान बनने की चाहत में इसका प्रचलन बढ़ता चला गया। नगर में बीते कुछ महीनों से तेज़ी से अवैध रूप से सट्टे का कारोबार तेज़ी से पांव पसार रहा है और सट्टा व्यापारी तेज़ी से फल फूल रहें हैं। सट्टे के बढ़ते क्रेज़ को देखते हुए कुछ लोगों ने इसे व्यवसाय बना लिया है। यह व्यापार इस कदर बढ़ा है कि शहर में रोज़ाना लाखों का सट्टा लग रहा है। पैसा कमाने की तीव्र चाहत और भाग्यवादी सोच के लोग तेज़ी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सट्टे में अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं। इस खेल में पड़कर युवा पीढ़ी बर्बादी की कगार पर जा रही है क्योंकि बिना मेहनत के अमीर बनने की चाहत रखे युवा पीढ़ी इसकी गिरफत में तेज़ी से आती जा रही है। एक का सौ बनाने की चाहत सट्टे के शौकीन लोगों को विनाश की ओर ले जा रही है। इस पर दांव लगाने वाले लोग यह नहीं जानते कि हार जीत का यह अंधा खेल अन्तहीन है। चोरी छिपे किये जाने वाले इस गैरकानूनी धंधे को बाकायदा एक खेल का रूप देकर इसे शहर में ही कई स्थानो पर खेला जा रहा है। शहर की तंग गलियों तक में सट्टा खेला जा रहा है। सट्टा कारोबार पुलिस की नाक के नीचे धड़ल्ले से फल फूल रहा है। इसके बावजूद पुलिस मामले में कोई ठोस कार्यावाही नहीं कर रही है। ऐसे में पुलिस की भूमिका भी संदेहास्पद है। सटटे के अधिकांश अडडे पुलिस के संज्ञान में है लेकिन उन पर कार्यावाही नहीं की जा रही है।

सट्टेबाज दे रहे पुलिस को चुनौती

जी हां सिवनी जिले में सट्टेबाज पुलिस वालों को खुलेआम चुनौती देते नजर आ रहे हैं सट्टेबाज बकायदा अपने आसपास सीसीटीवी कैमरे का उपयोग कर अपने यहां आने वाले हर एक व्यक्ति पर नजर बनाए है बकायदा चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे पर यह निगरानी करते हैं और खुलेआम अपना सट्टा मटका का खेल खिलाते हैं
यह है खेलने का तरीका
इस खेल में शून्य से नौ तक ईकाई, दहाई का अंक लगाने पर एक रूपये के दस रूपये मिलते हैं। इसके अलावा एक से सौ तक का कोई नंबर लगाने पर अगर फंस गया तो 12 रूपये के 100 रूपये मिलते हैं। हर जीत पर रकम का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा ऐजेन्ट का है। इसके अलावा हार पर भी कुछ इतना ही मिलना तय है। सट्टे के कारोबार में केवल खाइवाल अपना घर भरता है। ओपन और क्लोज़ के इस खेल में 9 घर खाइवाल के पास होते हैं जबकि एक घर खेलने वाले के पास। विनाश के इस खेल में रूपये का लेनदेन ईमानदारी से किया जाता है। सूत्रों की माने तो नगर में रोज़ाना लाखों रूपये का सट्टा खेला जा रहा है।
लोगों को होना पडे़गा जागरूक
सामाजिक कोढ़ बन चुके इस इस अवैध काम से बचने के लिये लोगों को खुद जागरूक होना पडे़गा। कम समय और बिना मेहनत के सट्टे और मटके के इस खेल में नौजवान गलत रास्ते पर चल पढे़ हैं और युवा पीढ़ी इसमें फंसती जा रही हैं। अंको के इस जाल में छात्र, नवयुवक, बेरोज़गार, मज़दूर वर्ग अधिक प्रभावित हो रहे हैं और किस्मत के भरोसे अपना सबकुछ गंवा रहे हैं। सट्टे के इस कारोबार को रोकने के लिये पुलिस प्रशासन के साथ साथ आम नागरिक और जनप्रतिनिधियों को भी आगे आना पडे़गा।
ज़रूरत है बड़ी कार्यावाही की
सटोरियों  पर की जाने वाली कार्यावाही में अधिकांश प्रकरणों में सज़ा जुर्माना के तौर पर होती है जिसका फायदा क्षेत्र के खाइवाल उठा रहे हैं। पहले तो धरपकड़ नहीं की जाती, और अगर उच्चाधिकारियों के अभियान में किसी को पकड़ भी लिया जाये तो अधिकांश जुए की धारा में जेल भेजे जाते हैं। शायद यही कारण है सटोरियों में कानून का कोई भय नहीं होता। खाकी की ओर से अनदेखी जारी है जिससे सट्टा कारोबारियों के हौंसले बुलन्द हैं। अधिकांश अडडे पुलिस के संज्ञान में है पर कार्यावाही शून्य जिससे संरक्षण की बात सामने आती हैं। पुलिस की कार्यावाही सट्टे के धंधे पर अंकुश लगाने में नाकाफी साबित हो रही है। क्षेत्र के सटोरियों पर कड़ी कार्यावाही की ज़रूरत है।

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