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एसडी खरे हुए पंचतत्व में विलीन

सिवनी। सेवा निवृत जिला मलेरिया अधिकारी शंभू दयाल खरे शनिवार की सुबह ब्रम्हलीन हो गए। वे लगभग 85 वर्ष के थे। आप जिला मलेरिया अधिकारी के पद से वर्ष 1992 में सेवा निवृत हुए थे। वे अपने पीछे पत्नि, एक पुत्री, तीन पुत्र चार्टर्ड एकाऊॅटेंट संजय खरे, दैनिक हिन्द गजट के प्रबंध संपादक शरद खरे एवं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक लिमटी खरे सहित नाती पोतों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। मूलतः दमोह निवासी एसडी खरे का जन्म 15 मार्च 1935 को दमोह में हुआ था। वे अपने पिता की चौथी संतान थे। आपने उस समय के जबलपुर के मशहूर माडल स्कूल और राबर्टसन कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की थी। आप प्रांतीय शिक्षण महाविद्यालय (पीएसएम) एवं माडल स्कूल जबलपुर में व्याख्याता भी रहे। आपने 1960 में बतौर जिला मलेरिया अधिकारी की नौकरी नीमच से आरंभ की। इसके बाद आप मंदसौर, सागर, दमोह, टीकमगढ़, मण्डला, पन्ना शहडोल में भी पदस्थ रहे। अपनी नौकरी के दौरान आप सबसे अधिक समय तक सिवनी में रहे और आपको सिवनी की आबोहवा इतनी भाई कि आप यहीं बस गए। आपने शनिवार की सुबह लगभग सात बजे अंतिम सांस ली। वे ज्यारत नाका स्थित अपनी पुत्री के निवास पर थे। आपकी अंतिम यात्रा आपके कनिष्ट पुत्र लिमटी खरे के हाऊसिंग बोर्ड स्थित निवास से कटंगी नाका मोक्षधाम के लिए रवाना हुई, जिसमें बड़ी तादाद में लोगों ने आपको अंतिम बिदाई दी। आपको मुखाग्नि आपके ज्येष्ठ पुत्र संजय खरे ने दी। परिवार इस दुख की घड़ी में परिजनों को गहन दुख सहने की क्षमता ईश्वर से प्रदान कर दिवंगत आत्मा की चिरशांति की कामना ईश्वर से करता है।

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