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भारत सरकार ने जारी की इंटरनेट गाइडलाइन्स, सोशल मीडिया कंपनियों ने किया विरोध

 पिछले कुछ सालों से राजनीति में सोशल मीडिया का दखल बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राजनीति और खासकर चुनावों को लेकर काफी गहमागहमी देखने को मिलती है। यह भी कहा जाता है कि सोशल मीडिया चुनावों को भी प्रभावित करने लगा है। अमेरिकी चुनावों में फेसबुक पर ऐसे आरोप लगे कि उसने पब्लिक व्यूज को एक खास दिशा में मोड़ने का काम किया। इसे लेकर मार्क जकरबर्ग तक को अमेरिकी संसद में पेश हो कर सफाई देनी पड़ी थी।

इंटरनेट गाइडलाइन्स तैयार

वहीं, भारत में भी सोशल मीडिया राजनीतिक प्रचार का बड़ा माध्यम बन गया है और दिन-ब-दिन ताकतवर होता जा रहा है। सोशल मीडिया  पर अलग-अलग देशों के कानून और प्रतिबंध लागू नहीं होते। इनकी बढ़ती ताकत और चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता को देखते हुए भारत सरकार ने इंटरनेट गाइडलाइन्स तैयार किया है, जिसके अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों खासकर फेसबुक और ट्विटर को कोई भी ऐसा कंटेंट जो गैरकानूनी माना जाएगा, 24 घंटे के अंदर हटाना होगा।

इससे पहले भी हो चुका है विवाद

गौरतलब है कि पहले भी व्हाट्सएप को लेकर विवाद होता रहा है। लेकिन सोशल मीडिया कंपनियां भारत के इंटरनेट गाइडलाइन्स के खिलाफ लड़ाई के लिए कमर कस रही हैं। सरकारी गाइडलाइन्स में कहा गया है कि फेसबुक और ट्विटर को कोई भी वैसी सामग्री को हटाना 24 घंटे के भीतर हटाना होगा दो ‘भारत की संप्रभुता और अखंडता’ को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं रॉयटर्स के अनुसार, फेसबुक और अन्य कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली लॉबी भारत के आईटी मंत्रालय के गाइडलाइन्स के विरुद्ध ड्राफ्ट तैयार करने के लिए लॉ फर्मों के साथ काम कर रही हैं। सोशल मीडिया कंपनियों के अधिकारियों का दावा है कि सरकार के गाइडलाइन्स सेंसरशिप की तरह हैं और इनका इस्तेमाल असंतोष को दबाने के लिए किया जा सकता है।

आपको बता दें कि अभी पिछले हफ्ते ही वेब ब्राउजर मोजिला ने ऑनलाइन हानिकारक या गलत सामग्री की समस्या से निपटने के लिए सरकार के इस कदम को गलत और अनुपयुक्त बताया, लेकिन आईटी मंत्रालय ने इससे इनकार करते हुए कहा कि गाइडलाइन्स सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने के लिए जारी किए गए हैं।

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