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नागरिकता संशोधन बिल: राज्यसभा में होगी मोदी सरकार की असली परीक्षा, जानिए ऊपरी सदन का पूरा गणित

लोकसभा ने 7 घंटे लंबी चली चर्चा के बाद सोमवार आधी रात को नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को मंजूरी दे दी। विधेयक के पक्ष में 311 वोट पड़े जबकि 80 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। जे.डी.यू. और एल.जे.पी. जैसी सहयोगी पार्टियों ने विधेयक के पक्ष में वोट किया वहीं शिवसेना, बी.जे.डी. और वाई.एस.आर. कांग्रेस जैसे गैर भाजपा दलों ने भी विधेयक के पक्ष में ही वोट किया। नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पर मोदी सरकार की असली परीक्षा अब राज्यसभा में होगी। बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा में तो भाजपा के पास बहुमत था इसलिए मोदी सरकार के इसे पास कराने में कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन सरकार राज्यसभा में अल्पमत में है, ऐसे में नंबर गेम अहम हो गया है। हालांकि सरकार को उम्मीद है कि जैसे तीन तलाक विधेयक और आर्टिकल 370 हटाने को निष्प्रभावी करने वाले विधेयक को राज्यसभा से पास करवाने में वह सफल रही थी, वैसे ही उसी रणनीति से वह इस बिल को भी पास करवा लेगी।

जानिए राज्यसभा का पूरा गणित

राज्यसभा में BJP की अगुआई वाले एनडीए
भाजपा की अगुआई वाले एनडीए के राज्यसभा में 83 सांसद हैं। जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडी(यू) के 6 सांसद हैं। बता दें कि नीतीश कुमार की पार्टी ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया है। हालांकि इस बिल को लेकर जेडी(यू) के दो स्वर हैं। जेडीयू नेता प्रशांत किशोर इस बिल के खिलाफ हैं। ऐसे में नीतीश राज्यसभा में क्या फैसला लेते हैं यह देखना होगा। वहीं एनडीए में शिरोमणी अकाली दल के 3, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के 1 जबकि अन्य दलों के 13 सदस्य हैं। इस तरह एनडीए गठबंधन के अपने 106 राज्यसभा सांसद हैं।

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UPA की ताकत
विपक्षी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) में कांग्रेस के सबसे ज्यादा 46 सांसद हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के चार-चार सांसद हैं। इनके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के अपने पांच सांसद है जबकि अन्य यूपीए सहयोगियों के तीन सांसद हैं। यानी, यूपीए के कुल 62 राज्यसभा सांसद हैं।

न एनडीए में, न यूपीए में

  • कुछ पार्टियां ऐसी हैं जो न एनडीए में शामिल हैं और न ही यूपीए में। हालांकि, विचारधारा के स्तर पर इन पार्टियों का रुख समय-समय पर बदलता भी रहा है। जो पार्टियां किसी भी गठबंधन में नहीं हैं उनमें राज्यसभा सांसदों के मामले में सबसे बड़ी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) है। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा में 13 सांसद हैं।
  • उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (एसपी) के 9
  • तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 6
  • मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के 5
  • उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के 4
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) के 3 सांसद हैं।
  • इनके अलावा, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के 2
  • भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का 1
  • कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) का 1 सांसद है। इन्हें मिलाकर आंकड़ा 44 सांसदों का है। इनमें में ज्यादातक दल नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ हैं।

गैर-गठबंधन दलों में ये भी शामिल

  • एनडीए और यूपीए, दोनों में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने वाले कुछ और भी दल हैं जो बिल के समर्थन में दिख रहे हैं।
  • इनमें तमिलनाडु की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 11
  • ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) के 7
  • आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के 2 आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के 2 सांसद हैं।
  • इनके अलावा, हाल में भाजपा से अलग होकर एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 3 सांसद हैं जो नागरिकता विधेयक के पक्ष में वोटिंग करेंगे। शिवसेना शुरू से ही इस बिल के पक्ष में है। लोकसभा में भी शिवसेना ने बिल का समर्थन किया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि शिवसेना राज्यसभा में भी सरकार के साथ खड़ी होगी।
  • इसके अलावा तीन और सांसदों के बिल के समर्थन में हैं। इन सबको मिलाकर कुल आंकड़ा 28 सांसदों तक पहुंचता है।
  • इसके साथ ही राज्यसभा में 12 नामित सदस्य होते हैं। इन 12 नामित सदस्यों में से 8 भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं और 4 अब भी नॉमिनेटड कैटीगरी में हैं। माना जा रहा है कि इसमें से 3 सदस्य एनडीए के पक्ष में जबकि 1 सांसद यूपीए के पक्ष में वोटिंग करेंगे।

किसका पलड़ा भारी
राज्यसभा में 245 सीटें हैं। हालांकि, मौजूदा स्ट्रेंथ 240 सांसदों का ही है क्योंकि पांच सीटें (असम से दो जबकि बिहार, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा से एक-एक सीट) खाली हैं। इसलिए इस सदन में बहुमत का आंकड़ा 121 का होता है। स्पष्ट है कि 137 सांसदों के समर्थन से सत्ताधारी गठबंधन नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 को राज्यसभा से भी पास करवाने में सफल हो सकता है। एनडीए के 106 सांसदों के साथ बिल के समर्थन में आनेवाले अन्य 28 सांसदों और 3 नामित सांसदों को जोड़ दिया जाए तो आंकड़ा 137 तक पहुंच जाता है। दूसरी तरफ यूपीए के 62 और विरोध में वोटिंग करने वाली नौ पार्टियों के 44 सांसदों को मिलाकर 106 का आंकड़ा आता है। इसमें एक नामित सदस्य का वोट जोड़ने पर यह आंकड़ा 107 तक पहुंचता है।

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