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नरसिंहपुर में करोड़ों के सड़क निर्माण में विसंगति आखिर क्यों ?

मॉडल रोड बनने के बाद भी जेल के पास की पुलिया नहीं हुई चौड़ी

राष्ट्र चंडिका नरसिंहपुर – (✍🏾अमर नोरिया)  चंद रोज बाद नगरीय निकायों के चुनाव का बिगुल बज जायेगा और इन चुनावों में एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष अपने अपने किये गये कार्यों की उपलब्धि गिना गिना कर अपने अपने दलों के लिये वोट मांगेंगे और इन सब बातों के चलते ही नगर पालिका सीमा अंतर्गत शहरी क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़कों के निर्माण में बड़ी ही विसंगति देखने को मिल रही है उसको लेकर आमजनमानस में जिज्ञासा बनी हुई है । नरसिंहपुर शहर में नगर पालिका के द्वारा मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना के तहत बनाई गई मॉडल रोड जिसके निर्माण को लेकर पूर्व में कांग्रेस सहित अन्य जागरूक नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार आवाजें उठाते रहे हैं उसकी ड्राइंग डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण निर्माण को लेकर कब कैसी क्या योजना थी और उसको उस अनुसार बनाया गया है कि नहीं यह आज भी सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं हो सका है उसकी वजह यह कि अनेकों स्तर पर इस रोड के निर्माण को लेकर ज्ञापन और शिकायतें हुई किंतु उन पर क्या कार्रवाई हुई और इस रोड के निर्माण में कितना सुधार हुआ यह जानकारी फिलहाल जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देती है महत्वपूर्ण बात यह भी है कि नरसिंहपुर शहर में बनाई गई 11.70 लाख रुपये की राशि से निर्मित मॉडल रोड के डीपीआर को लेकर जो जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णकांत कौरव द्वारा मांगी गई थी उन्हें यह जानकारी प्रदान नहीं की है ,जनहित से जुड़े इस मामले की जानकारी को लेकर अंततः कृष्णकांत कौरव को राज्य सूचना आयोग की शरण लेनी पड़ी है उन्हें जब राज्य सूचना आयोग से मॉडल रोड के निर्माण से सम्बंधित जब पूरी जानकारी मिलेगी तब इस रोड के पूरे निर्माण की असलियत सामने आ पायेगी । नगर पालिका सीमान्तर्गत शहरी क्षेत्र में एक सीसी रोड बनाई जा रही जो कि  बाईपास रोड टटटा पुल से होते हुए गांधी चौक , स्टेडियम ग्राउंड के सामने,बीएसएनएल कार्यालय के सामने से होते हुए सुभाष पार्क चौराहा तक एवं रेलवे स्टेशन से बायपास रोड तक 1208.78 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही है । इसी रोड के बीच मार्ग में वन विभाग के पास एक जो पुरानी पुलिया थी उसका चौड़ीकरण कर निर्माण किया जा रहा है , करोड़ो रुपयों की लागत से बनाई जा रही इन सड़कों के निर्माण में जो विसंगति पाई गई वह यह कि मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना के तहत बनाई गई मॉडल रोड के बीच में भी जेल के पास पड़ने वाली एक पुलिया को  जब रोड का निर्माण किया जा रहा था तो उस पुलिया को चौड़ी करण करके निर्माण क्यों नहीं किया गया ? आज भी अनेक मौकों पर यह बात देखने में आती है कि ट्रैफिक की अधिकता होने की वजह से इस मॉडल रोड में उस संकीर्ण पुलिया होने की वजह से  अनेक वाहन चालकों को इसके संकरें होने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा  है । शहर को विकास ओर उन्नति के मार्ग पर ले जाने की कवायदें के चलते व्यवस्थित और सुरक्षित आवागमन और सुंदरता को लेकर जब प्रशासनिक स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जाती है तब यह सब बातें और इससे जुड़े सवाल आमजनों के जेहन में अनुत्तरित रहते हैं  और तब लगता है कि आखिर जब एक शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों का निर्माण पूर्ण किया जा रहा है तो एक मार्ग पर जहां पुलिया के निर्माण को चौड़ीकरण कर रोड का निर्माण किया जा रहा है किंतु शहर के मुख्य मार्ग मॉडल रोड में यह पुलिया आखिर चौड़ी क्यों नहीं की गई यह तकनीकी खामी है या व्यवस्थागत ऐसी कोई कमी है या फिर मॉडल रोड की स्वीकृति में इस पुलिया को चौड़ा करके रोड निर्माण करने का प्रावधान था या नहीं यह बात जब इस मॉडल रोड के निर्माण को लेकर जब राज्य सूचना आयोग के निर्देश पर जानकारी दी जायेगी तब ही यह सच सामने आयेगा । फिर भी महत्वपूर्ण बात यह भी है कि करोड़ों रुपयों की लागत से बनाई जा रही इन सड़कों में यह अनदेखी और विसंगति आखिर कैसे हो गई इसका जवाब नरसिंहपुर के उन जिम्मेदारों को भी देना होगा जो यह सब देखते हुए भी अपने आप में इस बात को लेकर कभी ना कभी चुप रहे हैं लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि करोड़ों रुपयों की लागत से बनने वाली यह सड़के आने वाले नगरपालिका चुनाव में एक बड़ा मुद्दा रहेंगी ….✍🏾

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