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भारत के लिए शुभ है शनि का राशि परिवर्तन

जालन्धर: शुक्रवार करीब दोपहर 12 बजे धनु राशि से मकर राशि में हो रहा शनि का गोचर देश के आर्थिक विकास के साथ-साथ देश का विदेशों में गौरव बढ़ाने वाला भी साबित होगा। 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में आए मौजूदा भारत की कुंडली वृष लगन की है और शनि इस कुंडली में नवम (त्रिकोण भाव) और दशम (केन्द्र भाव) का स्वामी होकर योगाकारक ग्रह की भूमिका अदा करता है। योगाकारक ग्रह का अपनी राशि में आ जाना भारत के विकास की दृष्टि के लिहाज से शुभ है। भारत की कुंडली में इस समय चंद्रमा की महादशा के भीतर शनि की ही अंतर्दशा चल रही है। लिहाजा अपनी इस अंतर्दशा के दौरान योगाकारक ग्रह शनि अच्छे फल देगा। आने वाले अढ़ाई साल में भारत में रोजगार की दृष्टि से अच्छा काम होगा, जबकि अध्यात्म की दृष्टि से भी भारत का नाम बढ़ेगा। देश में धार्मिक टूरिज्म में इजाफा हो सकता है।

मोदी बड़े फैसले लेंगे 
शनि का यह गोचर प्रधानमंत्री की कुंडली के लिहाज से भी शुभ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न की है और चंद्रमा भी वृश्चिक राशि में है। शनि के गोचर के साथ ही प्रधानमंत्री शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से मुक्त हो जाएंगे। मोदी की कुंडली में तीसरे भाव का शनि पराक्रम में वृद्धि करेगा जिससे आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री बड़े और साहसिक फैसले लेंगे। हालांकि उनके कुछ फैसलों को लेकर विवाद भी पैदा हो सकता है क्योंकि इस भाव में बैठे शनि की पंचम पर दृष्टि उनके बुद्धि और विवेक को प्रभावित करेगी।

शनि करीब 30 साल बाद अपनी राशि में आ रहे हैं, इससे पहले शनि मार्च 1990 में मकर राशि में आए थे। शनि का अपनी राशि में आना ही एक तरह से शुभ संकेत है। शनि के इस गोचर से पाप कर्म के रास्ते पर चल रहे लोगों के बुरे दिन आएंगे जो लोग शनि के साढ़ेसाती के प्रभाव में हैं।
-आशु मल्होत्रा, जालन्धर 

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