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जिला बदर अपराधियों के घर में काटी जा रही है बेखौफ सट्टे की पट्टी

*आचार संहिता के चलते अवैध धंधों की भरमार*
 एक तरफ जब शासन और प्रशासन चुनावी तैयारियों में व्यस्त है। क्षेत्र में जिला बदर अपराधियों के घर में खुलेआम सट्टे की पर्चियां काटी जा रही है  अवैध धंधो वालों की दिवाली हो गई है। क्षेत्र में ऐसा कोई धंधा नहीं है जो अवैध की श्रेणी में आता है और यहां उस धंधे का संचालन ना हों रहा हो।
       राष्ट्रचंडिका सिवनी। सट्टे का कारोबार खूब फलफूल गया है। कई घर अब तक इस सट्टे के कारण तबाह हो चुके हैं और कई उजडऩे की कगार पर हैं। चंद सैकेंड में अमीर बनने की लालसा में अंधे होकर लोग इस सट्टे रूपी जुए के खेल को खेलते हैं। इस धंधे से जुड़े लोग कई गरीबों के घर उजाडऩे में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं। ये लोगों को रातोंरात अमीर होने का सब्जबाग दिखाते हैं और उनसे 1 से 100 तक किसी भी एक अक्षर पर सट्टा लगाने को कहते हैं। रातोंरात अमीर बनने की चाह में लोग अपनी मेहनत की कमाई सट्टे में लगाकर अपना सब कुछ बर्बाद कर बैठते हैं। एक रुपए के 90 रुपए वही अंक आने पर मिलते हैं। यदि अंक न निकले तो लालच में वे दोबारा फिर से दूसरे अंक पर रुपया लगा देते हैं।
सबसे ज्यादा सट्टा मजदूर वर्ग लगाता है। वे दिन भर मेहनत करते हैं और शाम के समय घर पर कुछ सब्जी लेकर जाएं न जाएं लेकिन सट्टे रूपी जुए का नम्बर जरूर लगाकर जाएंगे। उनके घर पर भी इस बात को लेकर क्लेश रहता है लेकिन ये लोग सुधरने की बजाय सट्टे की गेम खेलने में लगे रहते हैं। सारा दिन काम करते समय भी इनका ध्यान नम्बर बनाने में रहता है।
स्कूली छात्र भी अब इस गेम में अपना भाग्य आजमाने लग पड़े हैं। सट्टा माफिया इनका जीवन बर्बाद करने में आगे ही है। वह भी स्कूली छात्रों को पर्ची लगाने से इंकार करने की बजाय उनको इस खेल में फायदे बता रहा है। खाइवाल पूरी तरह से सट्टा रूपी जुए से सबके घर तबाह करने में जुट गए हैं। उनको पुलिस के डंडे का भी डर इसलिए नहीं होता क्योंकि इस केस में जमानत मौके पर ही हो जाती है। उसके बाद वे लोग फिर से अपने कार्य को अंजाम देना शुरू कर देते हैं।
जिला बदर अपराधी के अंगने में चल रहा तीन पत्ती का खेल
इतना ही नहीं सट्टे के बाद इस महिला किंग जो (पति पत्नी जिला बदर है ) फिर भी आचार संहिता लगने के पश्चात भी उनके घर बेखौफ  अवैध धंधे चल रहे हैं बताया जाता है  की तीन पत्ती नामक जुएं का खेल भी अपने घर में शुरू करवा दिया है जहां धड़ल्ले से युवा वर्ग जमावड़ा लगाकर अपना भाग्य आजमाता है। इतना ही नही नई पीढ़ी के युवा इस किस्मत के खेल में हाथ आजमाकर जल्दी अमीर बनना चाहते हैं लेकिन यहां आकर कई युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। लता की इस दुकानदारी का विरोध अब तक किसी भी सामाजिक संगठन या जनप्रतिनिधि ने नहीं किया जो बात बात पर समाज सुधारने की बात करते हैं। बहरहाल अब यह पुलिस के लिए जांच का विषय है कि वह कब तक लता के इस काले साम्राज्य पर लगाम लगाती है वरना युवा पीढ़ी बेरोजगारी के साथ साथ कर्ज की खाई में धंसते जायेगी।
        नगर कोतवाल जिला बदर अपराधियों से कुछ सधे हुए हैं इसीलिए उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने देते और जो परेशान करता है उसे व गरम कर देते हैं क्योंकि उनके राज में नगर में जिला बदर अपराधी खुलेआम घर में रहकर अवैध कार्यों को कर रहे हैं जिनका उन्हें इनाम मिल जाता है.
        जुओं और सट्टों में हजारों परिवार बर्बाद हो जाने के बाद भी इसे बन्द करवाने के जिम्मेदार आंखें मुन्दकर बैठें है। जिन क्षेत्रों में जिला बदर अपराधियों के घर में आचार संहिता के दौरान नगर निरीक्षक की नाक के नीचे खुलेआम  सट्टे का कारोबार फल फूल रहा है उन क्षेत्रों से पुलिस के वाहनों की दिन भर आवाजाही रहती है लेकिन इनकी नजऱ सट्टे के कारोबारियों पर नहीं पड़ती है। इससे सट्टे के कारोबारी भी बिना किसी दबाव के बेखोफ होकर हजारों लोगों को बर्बाद कर रहे है।

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