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पुलिस विभाग कर रहा है निर्वाचन आयोग को गुमराह

राष्ट्र चंडिका सिवनी .विगत वर्ष संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्र क्रमांक 273 में नगर कोतवाल श्री अरविंद जैन के द्वारा राष्ट्र चंडिका समाचार पत्र के प्रधान संपादक अखिलेश दुबे के साथ अभद्रता की गई थी। पूरा घटनाक्रम यह था कि मतदान केंद्र क्रमांक में ईवीएम मशीन सुबह 8 से लेकर 10:00 बजे तक प्रारंभ ही नहीं हुई थी और एक लंबी कतार मतदाताओं कि उक्त मतदान केंद्र में लग चुकी थी। जिसकी शिकायत पार्षद अभिषेक दुबे और अन्य भाजपा कांग्रेस के पदाधिकारियों ने की थी, किंतु उसके बाद भी उक्त ईवीएम मशीन को सुधारे जाने में बहुत अधिक समय लग रहा था। ठीक इसी समय राष्ट्र चंडिका समाचार पत्र के प्रधान संपादक अखिलेश दुबे वहां पर उपस्थित हुए और उन्होंने मतदाताओं का रोष देखा फिर अंदर जाकर सामान्य प्रक्रिया की फोटो ली। इस पर वहां उपस्थित हुए अरविंद जैन नगर निरीक्षक सिवनी ने अभद्रता पूर्ण व्यवहार करते हुए गंदी गाली दी और मतदान केंद्र से उन्हें बाहर निकाल दिया गया (इस विषय पर शिकायत तुरंत जिला निर्वााचन अधिकारी मोबाइल द्वारा दी गई जिला निर्वाचन अधिकारी ने भीआयोग ने संज्ञान लेने को कहां था) हुए कार्यवाही हेतु पुलिस महकमे सिवनी को आदेशित किया। किंतु यहां भी सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का की तर्ज पर पुलिस विभाग ही पुलिस की जांच में शामिल हुआ और मनचाहा प्रतिवेदन माननीय निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत कर दिया गया, जबकि उक्त पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी संपादित की गई थी साथ ही साथ उक्त मतदान केंद्र में सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे। जिस पर निर्वाचन आयोग ने भी लाखों रुपए खर्च किए थे ताकि किसी भी ऐसी घटना का सत्यता पूर्ण जांच की जा सके किंतु पुलिस विभाग ने ना तो वीडियोग्राफी की फुटेज निकालने का प्रयास किया और ना ही सीसीटीवी की कोई क्लिपिंग निकाली बल्कि अपने ही विभाग के निरीक्षक के द्वारा जो बयान दिए गए उन्हें ही आधार बनाकर माननीय निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया।

यहां यह उल्लेखनीय होगा कि पहला बयान नगर निरीक्षक का था कि पत्रकार अखिलेश दुबे ईवीएम मशीन की फोटो ले रहे थे जो कि अवैधानिक था, प्रश्न यह उठता है कि अगर कोई ईवीएम मशीन का फोटो लेता है तो अवैधानिक कृत्य के बदले वैधानिक कार्यवाही करते हुए उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई साथ ही साथ पीठासीन अधिकारी या पुलिस कप्तान को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई अपनी दूसरी बात पर नगर निरीक्षक महोदय कहते हैं कि यह कोई गंभीर प्रकरण नहीं था इसलिए कार्यवाही नहीं की गई। यहां दोनों विषयों में मतभेद दिखाई देता है या तो अखिलेश दुबे के द्वारा किया जा रहा कार्य अवैध नहीं था और अगर अवैध था तो कार्रवाई की जानी चाहिए थी। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि इस पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक कार्यालय से संपादित की जा रही है और प्रतिवेदन भी वहीं से बना कर भेजे जा रहे हैं जबकि उन्हीं के महकमे के अधिकारी की जांच हो रही है विभाग अपने ही अधिकारी का बचाव करते हुए निर्वाचन आयोग को अलग-अलग जानकारियां दे रहा है। जिससे कि निर्वाचन आयोग को गुमराह किया जा सके हमारा माननीय निर्वाचन आयोग से निवेदन है कि वह तो पूरे प्रकरण की वीडियोग्राफी निकलवाकर स्पष्ट पारदर्शी एवं सत्यता पूर्ण जांच कराई जाए जिससे कि आगामी समय में संपन्न होने वाले लोकसभा चुनाव पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण संपन्न किए जा सके।

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