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अप्रैल में कक्षाओं को लगाने का कोई औचित्य अब तक समझ नहीं आ रहा?

राष्ट्र चंडिका.  गर्मी से तो सभी परेशान हो जाते हैं किन्तु जब बात कोमल नन्हे बच्चों की हो तो यह और कष्टदायी हो जाता है. गर्मी आजकल मार्च अंत से ही पड़ने लगती है। तापमान 42 पर है। फिर अप्रैल 30 तक कक्षा लगाने की कोशिश की जाती है, बच्चे गर्मी से बीमार पड़ने लगते हैं तो कक्षा 20 अप्रैल तक कर दी जाती है फिर अखबारों में छपना चालू होता है, तब कलेक्टर साहब मसीहा बन कर सामने आते हैं और 15 अप्रैल तक कक्षाएं समाप्त हो जाती है.इधर अप्रैल में चार पाँच छुट्टी भी हर साल होती हैं, यानी कुल मिला कर 8 या 10 दिन कक्षा लगा कर नूरा कुश्ती का अंत हो जाता है.इधर मार्च अंत में आयकर कटोती के कारण मार्च की तनख्वाह आधी अधूरी मिलती है और अप्रैल की तनख्वाह नये वित्त वर्ष के प्रारंभ होने से 10 से 15 अप्रैल तक मिलती है l नये सत्र की किताबें, कापियां, बस्ता बॉटल आदि मिलाकर कुछ 5000 से 7000 तक का फटका एक बच्चे के नाम पर पालक को लगता है,
हासिल क्या है इसका? जागरूक पालक स्वयं बच्चो को गर्मी में पढ़ाते भी है और अन्य गतिविधियों में उन्हे सीखने सिखाने के लिए भेजते ही है l

तब फिर ये ड्रामा क्यूँ.
ऐसा ही तमाशा स्कूल खुलने के समय.
10 जून को गर्मी चरम पर होती है तब स्कूल प्रारंभ हो जाते हैं, मालवा में मानसूनी बारिश का औसतन आने का समय 20 जून है और कई वर्षो से ये जुलाई के प्रथम सप्ताह तक ही आती है तो स्कूल जल्दी चालू कर क्या संदेश देना चाहते हैं कि अप्रैल की गर्मी बच्चे नहीं सह सकते इसलिए उन्हे जून में तपाया जाये….
भाई हम लोग मार्च में परीक्षा देते थे, 30 अप्रैल को परिणाम आता था और 1 जुलाई से स्कूल खुलते थे तो क्या हम अशिक्षित रह गये?

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