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थाना प्रभारी पर लगा छेड़छाड़ का आरोप, मिली क्लीन चिट

आखिर किस बात की समझाइश दी गई नगर निरीक्षक  को ?
*दोबारा ऐसा न हो थाना प्रभारी को  इस पर समझाईश दी गई है तो क्या उन पर आरोप सत्य थे इसीलिए उन्हें  उन्हें समझाइश दी गई*
* अगर यही छेड़छाड़ सामान्य इंसान करता तो यही पुलिस अधिकारी उस आवेदन  के जरिए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की बात करते*
राष्ट्र चंडिका सिवनी. कोतवाली थाना प्रभारी द्वारा अपने अधिनस्थ महिला पुलिस कर्मी पर छेड़छाड़ के लगे आरोप के मामले में एसडीओपी स्तर पर कराई गई जांच में टीआई को बरी कर दिया गया है। जबकि ऐसे मामले में विशाखा कमेटी से जांच होना चाहिए था। लेकिन इस मामले में जांच के लिए विशाखा कमेटी को मामला नहीं सौंपा गया है।

कोतवाली में लगभग तीन माह पहले महिला पुलिस कर्मी ने पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को लिखित शिकायत करते हुए कोतवाली के थाना प्रभारी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। पुलिस अधिक्षक के सामने जब यह मामला आया तो उन्होंने इसकी जांच एसडीओपी को सौंप दी। हालांकि जांच के बाद थाना प्रभारी को क्लीन चिट दे दी गई। साथ ही पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी को भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृति नहीं होने की सख्त हिदायत दी। वहीं किसी भी कार्यालय में महिला के साथ होने वाली इस प्रकार की घटनाओं को लेकर विशाखा कमेटी और कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ कमेटी से जांच भी कराई जाती है। लेकिन ऐसे गंभीर मामले में जांच के लिए विशाखा कमेटी को मामला नहीं सौपे जाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है।
क्या है विशाखा की गाइडलाइन्स
संस्थानों या कार्यस्थल पर एक शिकायत समिति, एक विशेष सलाहकार होने चाहिए और शिकायतों के मामलों में पूरी तरह से गोपनीयता सुनिश्चित की जाए। साथ ही शिकायत समिति का प्रमुख एक महिला को बनाया जाना चाहिए और इस समिति के कम से कम आधे सदस्य महिलाएं ही बनाई जाएं। वरिष्ठ स्तर से किसी अवांछित दबाव या प्रभाव का सामना करने के लिए शिकायत समिति में तीसरे पक्ष के तौर पर कोई एनजीओ या यौन प्रताडऩा से जुड़े मुद्दों की जानकार संस्था को जोड़े रखा जाए।
इनका कहना है
उक्त मामला सामने आया था, शिकायत के आधार पर एसडीओपी से जांच कराई गई थी। महिला ने शिकायत वापस ले ली है। दोबारा ऐसा न हो थाना प्रभारी को इस पर समझाईश दी गई है।
ललित शाक्यवार, पुलिस अधीक्षक, सिवनी.

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