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मेगा ट्रेड के बाहरी व्यापारियों ने नहीं कराया मुसाफिरी दर्ज

माने तो मेगा ट्रेड फेयर के संचालक अपने आपको उच्च स्तरीय एप्रोच वाला समझते हैं
   राष्ट्र चंडिका  सिवनी. पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल पंप के पास स्थित ट्रस्ट की जमीन में नियम विरूद्ध तरीके से मेगा ट्रेड फेयर लगाया गया है जिसमें बाहर से दुकानदारों ने आकर अपनी अपनी दुकान सजाया है। सूत्र बताते हैं कि जितने दुकानदारों ने मेगा ट्रेड फेयर में दुकानें लगाई है उनमें से अधिकांश दूसरे जिले या प्रदेश से आए हुए हैं जिन्होंने थाने में जाकर मुसाफारी दर्ज नहीं कराई। बड़ा सवाल यह है कि आचार संहिता चल रही है और ऐसे में बाहर से आकर कोई व्यक्ति नियम विरूद्ध तरीके से व्यवसाय कैसे कर सकता है? जानकारों की माने तो यदि अन्य प्रदेश या अन्य जिले से आकर कुछ दिनों के लिए दुकान या व्यापार करने वाले लोगों को थाने में जाकर अपने समस्त दस्तावेज दिखाते हुए यह बताना होता है कि वह किस उद्देश्य से आए हैं और कब तक रहेंगे । साथ ही उन्हें मुसाफिर भी दर्ज कराना होता है लेकिन मेगा ट्रेड फेयर में पहुंचे व्यापारियों ने ऐसा नहीं किया।
सूत्रों की माने तो मेगा ट्रेड फेयर के संचालक अपने आपको   उच्च स्तरीय एप्रोच वाला समझते हैं। बताया जाता है कि उन्हें ना तो शासन का डर है और ना ही प्रशासन का इसलिए वह ना केवल मुसाफिर दर्ज कराए बिना दुकान खोलकर बैठे हैं बल्कि मेगा ट्रेड फेयर में बेखौफ होकर तेज आवाज में डीजे भी बजा रहे हैं। जबकि वह इस बात को अ’छी तरह से जानते हैं कि चंद कदमों की दूरी में जिला अस्पताल मौजूद हैं जहां मरीज भर्ती है और अस्पताल के पास ध्वनि विस्तार यंत्र वर्जित होते हैं पर धन्य है उक्त मेगा ट्रेड फेयर को अनुमति देने वाले विभाग जिन्होंने चंद सिक्कों की खनक के सामने नियमो को दरकिनार रखते हुए अनुमति दे दिया।
कपड़े और पॉलीथिन से घिरी है दुकाने-
जब से गर्मी शुरू हुई है तब से ही जगह-जगह आग लगने का सिलसिला चल रहा है जिसकी तरफ प्रशासन ने ध्यान दिया ही नहीं। यदि प्रशासनिक अधिकारी मेगा ट्रेड फेयर में जाकर निरीक्षण करें तो उन्हें पता चल जाएगा कि मेगा ट्रेड फेयर में आगजनी से बचने के कोई पर्याप्त साधन नहीं है यदि वहां कोई घटना घटती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है जिसका कारण उक्त पूरा पंडाल पॉलिथीन से बना हुआ है। पंडाल के ऊपर  पॉलीथिन बिछी  हुई है साथ ही भीतर जो दुकानें लगी है उनमें से अधिकांश दुकानें कपड़ों की है वहीं फाइबर और लकड़ी के सामान भी बेचे जा रहे हैं यदि अज्ञात कारणों के चलते आगजनी जैसी घटना होती है तो अंदर मौजूद ग्राहकों के बाहर निकलने के लिए भी कोई इमरजेंसी रास्ता नहीं है ऐसे में यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो ना केवल मेगा ट्रेड फेयर में पहुंचने वाले ग्राहक प्रभावित होंगे बल्कि वहां की आग करीब स्थित पेट्रोल पंप तक भी पहुंच सकती है। हालांकि मेगा ट्रेड फेयर के संचालकों के द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है की वहा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं लेकिन हकीकत क्या है यह मौके पर जाकर देखा जा सकता है । आश्चर्य बात का है कि इस मामले को लेकर ना तो एसडीएम सक्रिय नजर आ रहे हैं और ना ही सीएमओ यहां तक कि कोतवाली थाना प्रभारी भी उक्त मेगा ट्रेड फेयर को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे यदि समय रहते अधिकारियों ने मेगा ट्रेड फेयर की लापरवाही पर अंकुश  नहीं लगाया  तो वहां मौजूद व्यापारी लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करते हुए शहर से अ’छा खासा पैसा कमाकर  चले जाएंगे और छोड़ जाएंगे कई सवाल।
तीन दिन बाद भी सीएमओ नही बता पाए अनुमति है अथवा नही
पेट्रोल पंप से चंद कदमों की दूरी में बाहर से आए हुए लोगों ने मेगा ट्रेड फेयर लगाया हुआ है जिसके लिए नगर पालिका परिषद के द्वारा अनुमति ली अथवा नहीं यह पूछने के लिए & दिन पहले प्रभारी सीएमओ गजेंद्र पांडे से चर्चा की गई थी तो उन्होंने बताया था कि मैंने अभी प्रभार लिया है और कार्यालय से बाहर हूं इसलिए फाइल देखकर बता पाऊंगा लेकिन & दिन हो गए अभी तक गजेंद्र पांडे यह नहीं बता पाए कि आखिर पेट्रोल पंप के पास मेगा ट्रेड फेयर के लिए किन शर्तों के आधार पर अनुमति दी गई है अथवा नहीं दी गई है। इस संबंध में जानकारी के लिए गजेंद्र पांडे को फोन लगाया गया तो पहले उन्होंने फोन उठाया ही नहीं और बाद में उनका फोन बंद बताने लगा जो कई तरह के सवालों को जन्म देता है । बहरहाल देखना यह है कि इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर प्रवीण अढ़ायच  गंभीरता से लेते हैं या नहीं।

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