Breaking News

MP में मोदी लहर ने उत्साह से भरी कांग्रेस का निकाला दम

भोपाल: लंबे समय से भाजपा का गढ़ रहे देश के चुनिंदा राज्यों में से एक, मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने भले ही पांच महीने पहले अपना परचम फहरा कर भाजपा को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया हो।  लेकिन लोकसभा चुनाव में 29  में से 28 सीटों पर बंपर जीत के साथ पार्टी ने एक बार फिर कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं का भी दम निकाल दिया है। राज्य की एकमात्र छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के खाते में गई है, लेकिन वहां भी पार्टी  प्रत्याशी और मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ का जीत का अंतर सिमट कर मात्र करीब 37 हजार मतों का रह गया है। इसी सीट से पिछली बार स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने करीब सवा लाख मतों से जीत हासिल की थी। ये सीट कांग्रेस की परंपरागत गढ़ मानी जाती है।

सिंधिया को अपने ही गढ़ में मिली हार
मोदी लहर’की बदौलत राज्य में इस बार कई ऐसे प्रत्याशियों की भी नैया पार हो गई है, जिन्हें प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद न केवल क्षेत्र की जनता का, बल्कि कार्यकर्ताओं का भी विरोध झेलना पड़़ा था। वहीं पार्टी के बिल्कुल नए 15 चेहरों ने भी इसी लहर के चलते भारी अंतर से अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वियों पर जीत हासिल की है। राज्य में जिन दिग्गजों की हार बिल्कुल अप्रत्याशित रही, उसमें पहला नाम कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का रहा। सिंधिया को एक समय में उनके ही समर्थक रहे केपी यादव ने करीब एक लाख 20 हजार मतों से शिकस्त दी है। सिंधिया परिवार का गढ़ रही गुना-शिवपुरी सीट का इतिहास रहा है कि यहां से सिंधिया परिवार के सदस्यों को सदैव जीत हासिल होती है, लेकिन इस बार ये धारणा भी टूट गई।

जीत के लिए दिग्गी के तमाम हथकंडे हुए फेल
कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना कर चुकीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर के समक्ष जीत नहीं हासिल कर पाए। भोपाल सीट अपने दोनों प्रत्याशियों की बदौलत‘हिंदुत्व की प्रयोगशाला’के तौर पर देश भर में प्रचारित हो गई थी, लेकिन एक समय कथित तौर पर हिंदुत्व विरोधी रहे सिंह हिंदू धर्म से जुड़े तमाम उपायों के बाद भी जीत नहीं हासिल कर पाए। दिग्विजय सिंह के लिए कंप्यूटर बाबा ने न केवल धूनि रमाई, बल्कि सैकड़ों साधु-संतों ने भोपाल में डेरा भी डाला, लेकिन साध्वी की करीब तीन लाख 64 हजार से भी ज्यादा मतों से जीत ने भोपाल की जनता का रुख स्पष्ट कर दिया। विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुके कांग्रेस के दो दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह लोकसभा चुनावों में भी जीत का सेहरा अपने सिर नहीं बांध पाए।

About Akhilesh Dubey

Check Also

चार्जिंग पर लगा था मोबाइल, अचानक फटी बैटरी, खेल रहा मासूम हुआ गंभीर घायल

खरगोन: मोबाइल फोन पर गेम खेलते समय बैटरी फटने से सात साल का मासूम गंभीर रुप …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *