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शिवपुराण के वाचक और श्रोता रखेंगे इन बातों का ध्यान तो मिलेगा ऐसा फल

महादेव का गरिमामयी गुणगान अनेक पौराणिक शास्त्रों में किया गया है। सनातन संस्कृति के सभी शास्त्रों में भोलेनाथ को देवताओं में सर्वश्रेष्ठ और शीघ्र प्रसन्न होने वाला बताया है। भोलेनाथ भक्तों के थोड़े से विनय-अनुनय से प्रसन्न होकर उनको मनचाहा वरदान देते हैं। इसलिए बुराइयों के विघ्वंस के देवता को देव, दानव, यक्ष, किन्नर, मानव आदि पूरे मनोवेग से पूजते हैं।अठारह पुराणों मे से दो पुराण महादेव की विशाल गाथा को समर्पित है। ये शिवपुराण और लिंगपुराण है।

शास्त्रों में शिवपुराण के वाचन का विशेष महत्व बताया गया है। विशेष अवसरों पर शिवपुराण के वाचन से इस जन्म में सभी सुखों की प्राप्ति होने के बाद देहलोक गमन होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

– शिवपुराण करने वाले कथावाचक, संत, महात्मा अथवा योग्य ब्राह्मण को कथा प्रारंभ के दिन से एक दिन पहले ही व्रत ग्रहण करने के लिए क्षौर कर्म कर लेना चाहिए। इसके बाद कथा की समाप्ति तक क्षौर कर्म यानी बाल बनाना, शेविंग करना आदि नहीं करना चाहिए।

– गरिष्ठ अन्न यानी पचने में दिक्कत देने वाला, दाल, जला हुआ भोजन, मसूर तथा बासी अन्न खाकर शिवपुराण का श्रवण नहीं करना चाहिए।

– शिवपुराण का श्रवण करने वालों को कथा प्रारंभ होने से पहले कथावाचक से दीक्षा ग्रहण करनी चाहिए। दीक्षा लेने के बाद ब्रह्मचर्य का पालन करना, भूमि पर सोना, पत्तल में खाना और प्रतिदिन कथा समाप्त होने पर ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

– शिवपुराण कथा का व्रत लेने वाले पुरूष को प्रतिदिन एक ही बार जौ, तिल और चावल का भोजन करना चाहिए। व्रत लेने वाले को प्याज, लहसुन, हींग, गाजर, मादक वस्तुओं आदि का त्याग कर देना चाहिए।

– कथा का व्रत रखने वाले को काम व क्रोध और व्यसनों से बचना चाहिए साथ ही ब्राह्मणों व साधु-संतों की निंदा भी नहीं करनी चाहिए।

– शिवपुराण की कथा का श्रवण गरीब, रोगी, पापी, भाग्यहीन तथा संतान रहित पुरूष को अवश्य करना चाहिए।

– कथा की समाप्ति पर एक उत्सव का आयोजन करना चाहिए। शिव के साथ शिवपुराण की पूजा करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उनका सम्मान करना चाहिए। कथावाचक को उचित दान-दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए।

– कथा की समाप्ति पर श्रद्धा अनुसार कम से कम 11 ब्राह्मणो को शहद मिश्रित खीर और स्वादिष्ट मिष्ठान्नों के साथ भोजन करवाएं।

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