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सावन के आखिरी सोमवार, सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में करें ये काम

स्कंद पुराण के अनुसार प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन संध्याकाल के समय को ‘प्रदोष’ कहा जाता है और प्रदोष शिवजी को श्रावण मास तथा महा शिवरात्रि की तरह ही प्रिय है। इस दिन शिवजी को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है। कई जगहों पर अपनी श्रद्धा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों ही यह व्रत करते हैं। इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी कष्ट और पाप नष्ट होते हैं एवं मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति होती है।

सावन 15 अगस्त को समाप्त हो रहा है। आज सावन का आखिरी सोमवार और सोम प्रदोष व्रत है। सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में अपने घर शिवलिंग की स्थापना करें। वैसे तो भगवान शिव की पूजा किसी भी समय की जा सकती है लेकिन प्रदोषकाल में अत्यधिक पुण्यदायी है।

शुभ मुहूर्त- शाम 6.59 से रात 9.10 तक।

सनातन धर्म में विभिन्न प्रकार के शिवलिंगों की पूजा करने का विधान है, जैसे स्वयंभू शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग और पारद शिवलिंग। मगर स्वयंभू शिवलिंग की पूजा को सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है। शिवलिंग की पूजा-उपासना शिव पूजा में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। शिवलिंग घर में अलग तरह से स्थापित किया जाता है। शिवलिंग कहीं भी स्थापित हो पर उसकी वेदी का मुख उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए।

घर में स्थापित किया जाने वाला शिवलिंग बहुत अधिक बड़ा नहीं होना चाहिए। यह अधिक से अधिक 6 इंच का होना चाहिए। मंदिर में कितना भी बड़ा शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है। विशेष उद्देश्यों और कामनाओं की प्राप्ति के लिए पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा की जाती है। भगवान शिव की पूजा में जल और बेलपत्र, दोनों वस्तुओं का विशेष महत्व होता है। इन दोनों ही वस्तुओं से शिव जी की विधिवत पूजा की जा सकती है। इसके अलावा कच्चा दूध, सुगंध, गन्ने का रस, चंदन से भी शिव का अभिषेक किया जा सकता है।

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