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विज्ञान मेला दिवस भोपाल: इनोवेटर्स क्लब के खोजकर्ताओं ने किया अपने आविष्कारों का प्रदर्शन

भोपाल : भोपाल विज्ञान मेला 2019 का आयोजन 13 से 16 सितंबर तक किया गया। इस मौके पर मध्य प्रदेश इनोवेटर्स क्लब के नवाचारों ने अपने आविष्कारों को प्रदर्शित किया और आकर्षण का केंद्र बने। मध्य प्रदेश इनोवेटर्स क्लब के प्रतिनिधि इंजीनियर रियाज़ रफीक ने अपने साथी आविष्कारकों और उनके अविष्कार की विशिष्टताओं के बारे में जानकारी दी।

डॉक्टर दिनेश खरे पेशे से डॉक्टर हैं और क्रिटिकल केयर के दौरान जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने पर रुचि रखते हैं। इस बार उन्होंने बोर वेल में गिरे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक नवीन प्रणाली को विकसित किया है। इंजीनियर सतीश कुमार श्रीवास्तव जलवायु परिवर्तन पर संभावित समाधान को लेकर गहरी रुचि रखते हैं। इस बार उन्होंने रसोई के वाश बेसिन से इस्तेमाल के बाद निकास पर सबका ध्यान केंद्रित किया है और उस पानी को दोबारा कैसे रिसाइकल कर फिर से उपयोग में लाने लायक हो पायेगा इसके लिए एक नवीन प्रणाली को विकसित किया है।

साहिबा अली मास्टर ऑफ साइंस केमिस्ट्री की विद्यार्थी हैं। आतंकवादियों और असामाजिक तत्वों से मुठभेड़ में सेना एवं पुलिस की आकस्मिक मौत से वो बेहद विचलित हैं। सेना एवं पुलिस को जरूरी सुविधाएं से लैस कराने के लिए एक नवीन बुलेट प्रूफ जैकेट का ईजाद किया है। जिसमें यूजर को ध्यान में रखते हुए बुलेट प्रूफ जैकेट का वजन बाजार में उपलब्ध जैकेट से लगभग आधा है। वहीं सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार को कम करने के लिए यह जैकेट महज तीस हजार में बनाया है। जैकेट को बनाने में कोई भी वस्तु विदेश से आयात नहीं की गई है। इसमें इस्तेमाल होने वाले मेटेरियल एवं तकनीक पूरी तरह स्वदेशी हैं। हाल ही में शहडोल जोन के पुलिस महानिरीक्षक एस. पी. सिंह ने इस बुलेट प्रूफ जैकेट का परीक्षण करवाया। जिसमें 5 मीटर के दूरी से 9 एमएम की बुलेट जैकेट को नहीं भेद सकी सकी। साहिबा को इस शोध पर तीन साल का वक़्त लगा, और बहुत जल्द वे इसका पेटेंट के लिए आवेदन करेंगी

निशि विश्वास ने धान रोपने की मशीन बनाई है। जिसमें धान रोपने के लिए झुकना नहीं पड़ेगा। यह मशीन एक किसान अपने हांथ से चला लेगा जिससे किसानों के समय, पैसा और मेहनत की बचत होगी। मशीन की लागत लगभग 20 हजार रुपये है। हाल ही में इस मशीन को रीजनल साइंस सेन्टर के इनोवेशन फेस्टिवल में प्रथम पुरुष्कार दिया गया है। भगवान सिंह विश्वकर्मा ने पेट्रोल वाहन को इलेक्ट्रिक वाहन बदलने के लिए शोध किया है और उसका प्रणाली विकसित किया है। जिसमें पेट्रोल के किसी भी दो पहिया वाहन को इलेक्ट्रिक में परिवर्तित किया जा सकता है। इस नवाचार में भगवान ने गैस इंजन को हटा दिया है और 48 वोल्ट, 1kw BLDC मोटर को लगाया है जो 48 वोल्ट, 32Ah लीथीम-आयन बैटरी पैक द्वारा संचालित है। रूपांतरण के बाद वाहन चलाने की लागत 25 पैसे प्रति किलो मीटर तक हो जाती है। जो पारंपरिक वाहन से लगभग 2 रुपये प्रति किलोमीटर की खर्च आती थी। इस प्रणाली से पुराने पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक में परिवर्तित होने में लगभग 32 हजार रुपए की लागत आएगी। हाल ही में इस नवाचार को रीजनल साइंस सेन्टर के इनोवेशन फेस्टिवल में द्वितीय पुरुष्कार दिया गया है ।
सभी इनोवेटर्स ने मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर जनरल और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ० कपिल खरे को उत्साहवर्धन के लिये तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। सभी इन्नोवेटर्स ने राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार से अपने आविष्कार को आगे बढाने और स्टार्टअप के लिए आर्थिक मदद की अपील की है।

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