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मानसून सत्रः इस बार संसद में पास हुए विधेयकों की खास बातें

सोलहवीं लोकसभा का 18 जुलाई को शुरू हुआ 15वां सत्र आज अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। इस दौरान एससी/एसटी कानून को मूल स्वरूप में लाने, घूस लेने के साथ देने को भी अपराध की श्रेणी में रखने सहित 21 विधेयक लोकसभा में पारित हुए। संसद का १५वां सत्र मोदी सरकार के लिए भी बेहद अहम था क्योंकि कई महत्वपूर्ण बिल लटके हुए थे।

एक नजर इन आंकड़ों परः

  • इस दौरान 17 बैठकें हुईं, जो 112 घंटे चली।
  • स्थगनों के कारण आठ घंटे 26 मिनट का समय बर्बाद हुआ।
  • सत्र के दौरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया, जिस पर 11 घंटे 46 मिनट की चर्चा हुई।
  • सत्र के दौरान 22 विधेयक सदन में पेश किए गए, जबकि 21 पारित किए गए।

 बिलः भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून, 2018

  • लोकसभा में पासः 19/7/ 2018
  • राज्यसभा में पासः 25/7/ 2018

खास बातेंः 

  • 1. अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ 100 करोड़ रुपये या अधिक के आर्थिक अपराधों में शामिल होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो। वह व्यक्ति मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो गया हो, तो उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी माना जाता है।
  • 2. विशेष अदालत को किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उसकी बेनामी व अन्य संपत्ति जब्त करने का अधिकार होगा।
  • 3. जब्त करने के आदेश की तारीख से सभी संपत्तियों का अधिकार केंद्र सरकार के पास चला जाएगा।

स्टेट बैंक (रिपील और सांशोधन) बिल, 2017

  • लोकसभा में पासः 30/7/2018
  • राज्यसभा में पासः 18/7/2018

खास बातेंः 

  • 1. एसबीआई का विलय पांच अन्य बैंकों के साथ किया जाएगा।
  • 2. जिन बैंकों का विलय भारतीय स्‍टेट बैंक में किया गया है, वे हैं – स्‍टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्‍टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्‍टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्‍टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर।
  • 3. विलय के बाद एसबीआइ ग्राहक संख्या के हिसाब (50 करोड़ ग्राहक) से दुनिया का सबसे बड़ा बैंक हो जाएगा जबकि 22,500 शाखाओं के हिसाब से यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा।
  • 4. एसबीआइ की परिसंपत्तियां बढ़कर 37 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएंगी।

भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन बिल -2018

  • लोकसभा में पासः 24/7/2018
  • राज्यसभा में पासः19/7/2018

खास बातेंः 

  • 1. नए कानून में रिश्वत देने वाले को भी इसके दायरे लाया गया है।
  • 2. दोषी को तीन साल से लेकर सात साल तक की सजा और जुरमाना होगा. दोबारा अपराध करने पर पांच से दस साल तक की सजा और जुरमाना का प्रावधान है।
  • 3.लोकसेवकों पर भ्रष्टाचार का मामला चलाने से पहले केंद्र के मामले में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों से अनुमति लेनी होगी।
  • 4.रिश्वत देने वाले को अपनी बात रखने के लिए 7 दिन का समय दिया जाएगा, जिसे 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।
  • 5. जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रिश्वत किन परिस्थितियों में दी गई है।

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) बिल, 2017

  • लोकसभा में पासः 23/7/2018
  • राज्यसभा में पासः 25/7/2018

खास बातेंः 

  • 1. चेक बाउंस मामलों के दोषियों को 2 साल तक की सजा का प्रावधान है।
  • 2. चेक बाउंस होने की स्थिति में आरोपी की तरफ से पहले ही चेक पर अंकित राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी। बिल में प्रावधान है कि अगर निचली अदालत में फैसला आरोपी के खिलाफ आता है और वह ऊपरी अदालत में अपील करता है तो उसे फिर से कुल राशि की 20 फीसदी रकम अदालत में जमा करानी होगी।
  • 3. अदालत में मुकदमा चलने पर पीड़ित पक्ष को नुकसान ना हो, इसलिए 20 फीसदी अंतरिम राशि का 60 दिन के भीतर भुगतान किये जाने की अनिवार्यता होगी।
  • 4.अगर चेक देने वाला दोष मुक्त हो जाता है  तो कोर्ट शिकायतकर्ता  को आदेश  दे सकता है कि वह ब्याज के साथ अंतरिम मुआवजा लौटाए। यह राशि कोर्ट के आदेश के 60 कदनों के भीतर चुकाई जाएगी।
  • 5. देश भर की निचली अदालतों में चेक बाउंस के करीब 16 लाख मुकदमे चल रहे हैं जबकि 32,000 मामले उच्च अदालतों तक गए हैं।

विशिष्ट राहत संशोधन बिल, 2017

  • लोकसभा में पासः 15/3/2018
  • राज्यसभा में पासः 23/7/2018

खास बातेंः 

  • 1. हर इनफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर लागू होगा।
  • 2. अब ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लग सकेगी।
  • 3. किसी कार्य को समय पर पूरा करने और तय मानकों के अनुरूप काम न करने पर समझौता टूटने पर किसी तीसरी पार्टी से काम करने का विकल्प होगा।
  • 4. दोनों पक्षों के बीच के विवाद अब कोर्ट कटहरी के बजाए मध्यस्थों की मदद से सुलझाएं जाएंगे।
  • 5. यदि कोई ठेकेदार भाग जाता है तो दूसरे ठेकेदार द्वारा योजना पूरी की जाएगी और पैसा आवंटित फर्म से ही वसूला जाएगा।

आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2018 

  • लोकसभा में पासः 30/7/2018
  • राज्यसभा में पासः  6/8/2018

खास बातेंः 

  • 1. 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के अपराध के लिये दंड को सात वर्ष के न्यूनतम कारावास से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रावधान किया गया है।
  • 2. 12 वर्ष से कम आयु की लड़की से सामूहिक बलात्कार के अपराध के लिये दंड आजीवन कारावास होगा जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष जीवनकाल के लिये कारावास होगा और जुर्माना देना होगा अथवा मृत्यु  दंड होगा।
  • 3. 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप के मामले में न्यूनतम सजा को 10 वर्ष कैद से बढ़ाकर 20 वर्ष किया गया है ।
  • 4. 16 साल से कम उम्र की लड़की के साथ गैंगरेप के मामले में अभियुक्त को जीवन भर कारावास की सजा भुगतनी होगी।
  • 5. रेप के मामलों में जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय सीमा होगी।
  • 6. ऐसे मामलों की जांच अधिकारी भी महिला होगी। उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो सकेगा, ऐसे मामलों की सुनवाई महिला न्यायाधीश द्वारा ही की जाएगी।

संविधान (123वां संशोधन) बिल

  • लोकसभा में पासः 2/8/2018
  • राज्यसभा में पासः 6/8/2018

खास बातेंः 

  • 1. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा।
  • 2. नया आयोग सिविल कोर्ट की शक्तियों से लैस होगा। इस शक्ति से वह आरोपी को समन कर सकता है। सजा भी दे सकता है। जैसा कि राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग करता है।
  • 3. आयोग को अपनी खुद की प्रक्रिया बनाने की शक्ति होगी। आयोग को पिछड़े वर्गों के सुरक्षा उपाय से जुड़े मामलों की जांच और निगरानी का अधिकार होगा।

 अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां (अत्याचार निवारण) संशोधन बिल,2018

  • लोकसभा में पासः 6/8/2018
  • राज्यसभा में पासः 9/8/2018

खास बातेंः 

  • 1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए सरकार बिल लेकर आई।
  • 2. पुराने कानून को फिर से स्थापित किया गया।
  • 3. शिकायत किए जाने पर आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की जा सकेगी।
  • 4. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जांच अधिकारी को किसी अथॉरिटी की मंज़ूरी नहीं लेनी होगी।
  • 5. आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी।

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