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एक दर्जन से अधिक अफसरों की जान सांसत में

हनीट्रैप गैंग से बात करने वाले अफसरों से एसआईटी कर सकती है पूछताछ

 राष्ट्र चंडिका इंदौर .हनीट्रैप मामले ने प्रदेश के एक दर्जन से भी अधिक अफसरों की जान सांसत में डाल दी है। इस मामले की सरगना दोनों श्वेता जैन के मोबाइल की फोन की कॉल डिटेल्स एसआईटी के पास आ गई हैं। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने 12 मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स निकाली हैं। इनमें से उन अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है जिनसे इनकी लगातार बात हो रही थी। पता चला है कि हनीट्रैप गैंग ने लिपिस्टिक के कवर और चश्मे में हिडन कैमरे के जरिए वीडियो बनाए थे। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम सबसे पहले इन नंबरों के बारे में जानकारी जुटा रही है जिन पर लगातार बात हो रही थी। इन महिलाओं से पहले उन लोगों के बारे में जानकारी ले रही है जिन्हें इनके व्दारा ब्लैकमेल किया जा रहा था या जो इन्हें मदद कर रहे थे। इसके बाद उन नंबरों का विश्लेषण किया जाएगा जिनसे असाधारण रूप से बात हो रही थी। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जानकारी में ही एक दर्जन से अधिक अफसरों के नाम उभरकर आए हैं। कई अफसरों से वाट्सएप कॉल पर बात करने की जानकारी भी इन महिलाओं ने दी है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी, श्वेता स्वप्निल जैन, आरती दयाल और मोनिका यादव से लगातार पूछताछ कर इस बात की भी जानकारी जुटा रही है कि इस गैंग में और कौन-कौन लोग शामिल थे। श्वेता जैन को एसआईटी सागर लेकर गई है जहां इस मामले में और भी कुछ सबूत मिलने की उम्मीद है।

पिछली सरकार ने दबाया मामला
सूत्रों की माने तो प्रदेश में पिछले सरकार के समय यह मामला सामने आ गया था लेकिन कई राजनेताओं का नाम इस मामले में चर्चा में आने के बाद पूरे मामले को दबा दिया गया था। जांच टीम को इस गैंग से जो गजेट्स मिले हैं उनकी जांच के बाद पुराने मामले भी सामने लाए जा सकते हैं।

इधर आईटी कमिश्नर की एफबी पोस्ट से मची खलबली
इनकम टैक्स के चीफ कमिश्नर आरके पालीवाल ने फेसबुक पर एक पोस्ट करके हनी ट्रैप मामले से जुड़े अफसरों और राजनेताओं की धड़कने और चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने लिखा है कि हनी ट्रैप मामले में कई जन व्यापी अपराधिक पहलू है। अफसरों-राजनेताओं ने इन्हें गलत तरीके से फायदा पहुंचा कर जनधन का नुकसान किया है। भ्रष्टाचार की काली कमाई इन महिलाओं पर खर्च करने वालों पर आपराधिक और आयकर चोरी का मामला बनता है। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने बिंदुवार जो कुछ कहा है वह इस प्रकार है-

  1. गिरफ्तार गैंग के मामले में एक तो ब्लैकमेलिंग का अपराध है और दूसरा इससे जो धन संपत्ति बटोरी है उस पर आयकर अदायगी का मामला बनता है।
  2. जिन दूसरे लोगों यथा आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारी, मंत्री और सांसद एवं ठेकेदार आदि के नाम उछल रहे हैं। उनके मामले में यह जांच जरूरी है कि उन्होंने इस गिरोह को सरकारी अनुदान और ठेके देकर जन-धन का कितना नुकसान किया है और यदि इन्होंने अपनी काली कमाई इस पर खर्च की है तो यह भ्रष्टाचार और आयकर चोरी का मामला बनता है। जिस तरह इस मामले में बड़े नाम आ रहे हैं, हाईकोर्ट द्वारा भी स्वयं संज्ञान लेकर इस मामले की सघन जांच केंद्र और प्रदेश सरकार की संयुक्त टीम से कराई जा सकती है या कोई कानूनी एनजीओ ऐसा करने के लिए कोर्ट में पीआईएल भी कर सकती है।

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