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शिक्षकविहीन स्कूलों में संवर रहा बैगाओं के बच्चों का भविष्य

राष्ट्र चंडिका (सुमित चौरसिया)मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में शिक्षा के हाल-बेहाल हैं। कहीं बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है तो कहीं 5-5 कक्षाओं को पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक है। इतना ही नहीं कई सरकारी स्कूलों में तो जरूरत से ज्यादा भी शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। इस तरह की आसान्यता से कुल मिलाकर इन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का ही नुकसान हो रहा है।

बच्चों का भविष्य अंधकारमय : सरकार द्वारा हर साल शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं इसके बाद भी सरकारी स्कूल की स्थिति में कोई ज्यादा परिवर्तन दिखाई नहीं देता आखिर करोड़ों के आवंटन की राशि का उपयोग कहां हो रहा है। मंडला जिले में आदिवासी, बैगा बाहुल्य क्षेत्रों के लिए मवई विकासखण्ड जाना-पहचाना जाता है। बैगाओं को राष्ट्रीय मानव कहा जाता है इन बैगाओं के बच्चों का भविष्य शिक्षक विहीन स्कूलों में संवारने की बात कही जा रही है। मवई क्षेत्र में करीब दो दर्जन की संख्या में ऐसे स्कूल हैं जहां इन बच्चों को पढ़ाने के लिए रेग्यूलर शिक्षक ही नहीं है। अब ऐसे में ये बच्चे कैसे पढ़कर अपना भविष्य उज्जवल बनाएंगे इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यहां एक शिक्षिक और शिक्षिका पढ़ाई करा रहे हैं : एक ओर बड़ी संख्या में कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए एक भी रेग्यूलर टीचर नहीं रखा गया है तो वहीं कई ऐसे स्कूल भी हैं जहां शिक्षक हैं तो लेकिन पहली से पांचवी तक की कक्षा पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक रखा गया है। इनमें प्राईमरी स्कूल भराटोला, प्राईमरी स्कूल मानिकपुर, मिडिल स्कूल हर्राटोला पखवार, प्राईमरी स्कूल डोगराटोला, प्राईमरी स्कूल बरगांव, प्राईमरी स्कूल भडगाटोला, प्राईमरी स्कूल मुरता, सेटेलाइट स्कूल नवाटोला, प्राईमरी स्कूल रमपुरी, प्राईमरी स्कूल अतरिया, मिडिल स्कूल सोढा, प्राईमरी स्कूल सलैया, प्राईमरी स्कूल सारसढोली, प्राईमरी स्कूल सगोनछापर, प्राईमरी स्कूल ओराघोघरा, प्राईमरी स्कूल छतरपखना, प्राईमरी स्कूल मगराटोला, प्राईमरी स्कूल नदीटोला, प्राईमरी स्कूल पुनगांव, प्राईमरी प्राईमरी स्कूल टीकराटोला, प्राईमरी स्कूल रौघुट, प्राईमरी स्कूल थानाटोला, प्राईमरी स्कूल चुचरूंगपुर, प्राईमरी स्कूल वैगाटोला रवघुट, प्राईमरी स्कूल सरईटोला, प्राईमरी स्कूल अंग्रेजी माध्यम मवई, संकुल केन्द्र भीमडोगरी हैं।

इसी तरह प्राईमरी स्कूल लालपुर, प्राईमरी स्कूल भालापुरी, मिडिल स्कूल भीमडोंगरी संकुल केन्द्र घुटास, मिडिल स्कूल देवरीदादर, मिडिल स्कूल थाना हर्राटोला, प्राईमरी स्कूल डुडेरा टोला, प्राईमरी स्कूल कढवाटोला, प्राईमरी स्कूल नवगवां रैयत, प्राईमरी स्कूल सिघोरी, प्राईमरी स्कूल गोपीसजा, प्राईमरी स्कूल काठाटोला, प्राईमरी स्कूल घुटास पिपरिमाल, प्राईमरी स्कूल चंदवारा, केवलारी, छिदीटोला परसाटोला, भगदू, देवरीदादर संकुल केन्द्र दाढीभानपुर में बच्चों को मात्र एक शिक्षक ही पढ़ाई करा रहे हैं। हाईस्कूल कुम्हली, मिडिल स्कूल समनापुर, मिडिल स्कूल सकवाह, मिडिल स्कूल भानपुर, प्राईमरी स्कूल झिगराटोला, प्राईमरी स्कूल समनापुर, प्राईमरी स्कूल खम्हरीया, प्राईमरी स्कूल मादम टोला, प्राईमरी स्कूल ब्लाकटोला, संकुल केन्द्र मोतीनाला, प्राइमरी कन्या स्कूल मेढ़ा प्राइमरी स्कूल लूरी, प्राइमरी स्कूल ईजीएस लूरी में भी सिर्फ एक ही शिक्षक या शिक्षिका पर स्कूल की पढ़ाई सहित अन्य स्कूल संबंधित सरकारी कामकाज निपटाने की जिम्मेदारी है। यहां 18 बच्चों को पढ़ाने के लिए रखे गए हैं तीन शिक्षक : आपने देखा कि जिले में कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहां पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं है और कहीं हैं तो मात्र एक शिक्षक पर ही पहली से पांचवी तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अब आपको हम एक ऐसे स्कूल से भी परिचय कराते हैं जहां प्राइमरी स्कूल में एक, दो नहीं बल्कि तीन शिक्षक हैं। आप यदि इस पर आश्चर्य कर रहे हैं तो आपको यह जानकर और भी आश्चर्य होगा इस स्कूल में बच्चों की दर्ज संख्या में मात्र 18 है। यह स्कूल हैं जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत हिरदेनगर के पास संचालित प्राइमरी स्कूल बकौरा। नियमानुसार तो करीब 40 बच्चों पर एक शिक्षक जरूरी होता है लेकिन प्राइमरी स्कूल में अधिकारी ने सिर्फ 18 बच्चों पर तीन शिक्षक तैनात कर दिए हैं। बताया जाता है कि यहां एक शिक्षक बहुत पहले बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जिससे यहां अन्य शिक्षक की जरूरत महसूस की जा रही थी और जब अधिकारियों ने यहां शिक्षक भेजना शुरू किया तो एक के बाद एक करके दो शिक्षक एक ही महिने में यहां भेज दिए गए। जब जिले में ही कई ऐसे सरकारी स्कूल मौजूद हैं जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है तो फिर जिला मुख्यालय के पास स्थित एक स्कूल में मात्र 18 बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन-तीन शिक्षकों की पदस्थापना लोगों के गले नहीं उतर रही है। जो भी हो शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का चाहिए वे जल्द से जल्द प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना कराए। क्योंकि स्कूल सत्र के अनुसार तिमाही परीक्षाओं का समय शुरू हो गया है और अभी तक स्कूलों में शिक्षकों को ही न भेजना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।

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