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निमोनिया व दिमागी बुखार से बचाव के लिए जिले में पीसीवी वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू

नरसिंहपुर। विश्व स्वास्थ्य दिवस से जिले में बच्चों को निमोनिया और दिमागी बुखार से बचाने के लिए पीसीवी- न्यूमोकोकल कॉन्जूगेट वैक्सीन नि:शुल्क लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश के आयुष, कुटीर एवं ग्रामोद्योग (स्वतंत्र प्रभार) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटैल ने जिला चिकित्सालय में शनिवार को इस अभियान का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्री पटैल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जरूरतमंदों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवायें आसानी से उपलब्ध कराना है। बच्चे स्वस्थ रहेंगे, तो समाज एवं देश भी स्वस्थ रहेगा। इसी उद्देश्य से यह अभियान प्रारंभ किया गया है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य दिवस पर नागरिकों को शुभकामनायें दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
कार्यक्रम में डॉ. एलके वायवार और डॉ. अशोक शर्मा ने पीसीवी वैक्सीन लगाने के अभियान के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीसीवी वैक्सीन न्यूमोकोकस बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया के साथ दिमागी बुखार, कान के संक्रमण और अन्य बीमारियों से भी बचाव का सबसे कारगर तरीका है। इस अभियान को प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ विश्व स्वास्थ्य दिवस पर 7 अप्रैल से शुरू किया गया है। यह वैक्सीन अब नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त उपलब्ध है।
पीसीवी वैक्सीन के इस्तेमाल से बच्चों में निमोनिया बीमारी और बाल मृत्यु दर में कमी आयेगी। पीसीवी महंगी वैक्सीन है, जो अभी तक केवल प्रायवेट डॉक्टरों के पास ही उपलब्ध थी। प्रायवेट में पीसीवी की एक डोज की कीमत करीब 3 से 4 हजार रूपये है। भारत सरकार अब इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में मुफ्त में उपलब्ध करायेगी।
पीसीवी वैक्सीन तीन टीकों के रूप में दी जायेगी। पहला टीका बच्चे के डेढ़ महिने के होने पर, दूसरा टीका बच्चे के साढ़े तीन महिने के होने पर और तीसरा टीका बच्चे के नौ माह के होने पर लगाया जायेगा। पीसीवी पूरी तरह सुरक्षित एवं कारगर वैक्सीन है। पीसीवी वैक्सीन के लगने से गंभीर दुष्प्रभाव की आशंका नहीं के बराबर है। वैक्सीन लगने की जगह पर हल्का दर्द या बुखार हो सकता है। वैक्सीन से होने वाले फायदे इसके मामूली साइड इफेक्ट से कहीं ज्यादा हैं। अगर बच्चे को बुखार आता है, तो पैरासिटामोल की एक खुराक निर्धारित मात्रा में दी जा सकती है। समय से पहले जन्मे बच्चे (9 माह से पहले) को भी पीसीवी वैक्सीन का पहला डोज डेढ़ माह की उम्र पर दिया जा सकता है।
उन्होंने जानकारी दी कि निमोनिया एवं डायरिया 5 साल से छोटे बच्चों में मृत्यु के प्रमुख कारण हैं। निमोनिया का वैक्टीरिया स्वस्थ लोगों की नाक और गले में बिना बीमारी किए हुये भी पाया जाता है। यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है और निमोनिया, खून के इंफेक्शन, दिमागी बुखार, कान के इंफेक्शन जैसी कई बीमारियों को फैलाता है। न्यूमोकोकल बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने और छींकने से फैलती है। यह वैक्टीरिया 5 साल से छोटे बच्चों को विशेष रूप से 2 साल से छोटे बच्चों को, कम प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों को और वृद्धजनों को बीमार करता है। पीसीवी वैक्सीन उक्त बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. विजय मिश्रा, डॉ. एआर मरावी, डॉ. सीएस शिव, डॉ. व्हीके गर्ग, डॉ. अनंत दुबे, सुनील कोठारी, बंटी सलूजा, दीपक दुबे, संजय तिवारी, पार्षदगण, जिला अस्पताल का स्टाफ और नागरिकगण मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन लता अग्रवाल व श्री प्रवेश शंकर शर्मा और आभार प्रदर्शन सिविल सर्जन डॉ. मिश्रा ने किया।

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