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तरह-तरह के नामों के कूलर के लोकल ब्रांड बाजार में उतारे

शहर भर में कूलर और एसी का कारोबार गर्म 
राष्ट्रचंडिका, सिवनी।  गर्मी का मौसम शुरू होते ही जिले में तैयार करने वाले नकली विद्युत उपकरणों के उत्पादककर्ता भी सक्रिय हो उठते हैं, ऐसा भी नहीं कि इनका यह अवैधानिक कारोबार मात्र गर्मी के मौसम में ही चलता है। वरन इनका यह गौरखधंधा पूरे बारह माह बेखौफ ढंग े फल-फूलता रहता है ये बात अलग है कि गर्मी के मौसम में इनके इस माल की मांग और खपत दोनों काफी बढ़ जाते हैं।
    विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर तैयार हो रहे कूलर, पंखों सहित अन्य विद्युत उपकरणों के माथे पर उत्पादकगण नामीगिरामी कंपनियों के लेबल चिपकाकर उन्हें ऊंचे और महंगे दामों में बेचकर जमकर लाभ तो कमा ही रहे हैं। उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे गये माल भी ये पक्की रसीद न देकर शासन कोष में भी जमकर चूना लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि ये उत्पादकगण यहां बाहर से नकली और धटिया कंपनियों की अलग-अलग सामग्रियों को मंगाकर स्वयं के द्वारा हल्के व सस्ते दर वाले चादरों का सांचा तैयार कर उसमें रंग रोगन, सजावट कर बाहर से आयत की गई उक्त सामग्रियों को फिटकर उसके माथे पर ऊंची व नामीगिरामी कंपनियों की सील चिपकाकर बेच रहे हैं। ऐसे स्थान शहर की गली कूचों से सहित आसपास सटे ग्रामों में बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त कर तैयार किये जाने वालों की संख्या दर्जनों से कहीं अध्कि है। साथ ही यह भी बतलाया गया है कि इन कारखानों में ज्यादातर कम पैसों में काम करने वाले बालश्रमिकों को ही लगाया जाता है।
    जिला मुख्यालय सहित आसपास क्षेत्रों में हो रही घटिया और नकली उत्पादनों की खरीद फरोख्त की जानकारी संबंधित विभाग के आला अफसरों को है, लेकिन इस कथित कारोबारियों को अभयदान देना इनके बीच मधुर संबंधों की ओर इशारा करता है। गर्मी का सीजन शुरू होते ही एक बार फिर शहर भर में कूलर और एसी का कारोबार गर्म हो चुका है और इसी के साथ शुरू हो गया है कर चोरी का खेल। इस गौरखधंधा की हकीकत से वाजिज्यकर विभाग भी वाकिफ है, लेकिन यह बात अलग है कि इस संबंध में विभाग द्वारा कभी अभियान छेड़ते हुये र्कावाही नहीं की जाती। यहां के अधिकांश व्यापारी बड़े पैमाने पर बिना पक्के बिल के साथ कूलर सहित अन्य विद्युत उपकरणों का कारोबार कर रहे है और शासन को लाखों रूपये की कर चोरी कर चपत लगा रहे हैं।
सुनियोजित तरीके से चल रहा कारोबार
जानकारी अनुसार शहर में ही कूलर का थोक व फुटकर कारोबार करने वाले दर्जनों कारोबारी स्थनीय स्तर पर विभिन्न तरह के छोटे-बड़े कूलरों का उत्पाद कर कूलर बेचने के अलावा जिले भर में व जिले के बाहर भी सप्लाई कर रहे हैं। जानकारी मुताबिक ब्रांडेड कंपनियों के कूलर बाहर से आते हैं, जबकि लोकल माल में गिने जाने वाले कूलर स्थानीय स्तर पर ही तैयार किये जाते हैं। वहीं कुछ निर्माता कूलर की बॉडी यहीं तैयार कर पंखे व पंप बाहर से मंगाकर कूलर बनाते हैं। वहीं कुछ स्थानीय कूलर निर्माता इन दिनों बड़े पैमाने पर कूलर तैयार कर रहे हैं। जिनमें तरह-तरह के नामों के कूलर के लोकल ब्रांड बाजार में उतारे जा रहे हैं। इनमें से कुछ के उत्पाद संबंधित विभाग में रजिस्टर्ड नहीं है और ऐसे ही कुछ व्यापारी बड़े पैमाने पर व्यापार कर लाखों का मुनाफा बटोर रहे हैं।
एक अनुमान के मुताबिक सीजन में यहां स्थानीय स्तर पर 50-60 लाख का मासिक कूलरों का कारोबार किया जा रहा है। नियमानुसार इस मद में टिन नम्बर प्राप्त रजिस्टर्ड व्यापारियों को कूलर बिक्री कर निर्धारित कर विभाग में जमा करना अनिवार्य है, लेकिन शायद ही किसी कूलर कारोबारी द्वारा नियमानुसार कूलर बिक्री पर कर चुकाया जाता हो।
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