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स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने व खाने का संदेश दे रहा है मुरलीधर

बालाघाट। सम्पन्नता आने के साथ ही आधुनिक होते समाज में लोगों ने खाना पकाने के लिए धातुओं के बर्तनों का उपयोग करना प्रारंभ कर दिया है। लेकिन धातुओं के बर्तन में खाना पकाने एवं खाना खाने से भोजन के साथ धातुओं का कुछ अंश भी हमारे शरीर में चला जा रहा है। जिससे कम आयु में ही लोगों को बीमारियां घेर लेती है। स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मुरलीधर लोगों को मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने एवं खाने का संदेश दे रहा है।
बालाघाट जिले के तहसील मुख्यालय कटंगी से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम कटेरा का निवासी मुरलीधर टरेंडे मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करता है। लोगों की सुविधा के लिए कम समय में खाना पकाने के लिए वह मिट्टी के कुकर, कढ़ाही, तवा, थाली, चाय पीने के कप, केतली, नल वाले मटके बनाकर बेचने का काम करता है। मुरलीधर का कहना है कि यदि हम मिट्टी के बर्तनों में बनाया हुआ खाना खायेंगें तो निश्चित रूप से स्वस्थ्य रहेंगें और लंबी आयु जी सकते है। उसके बनाये हुए मिट्टी के कुकर व अन्य बर्तन आकर्षक होने के साथ ही प्रकृति से करीब होने के कारण बहुत पसंद किये जाते है और हाथो हाथ बिक भी जाते है। मुरलीधर मिट्टी के आकर्षक रंगों के सजावटी सामान, लाफिंग बुद्धा, गुलदस्ते भी बनाता है।
मुरलीधर बताता है कि उसका परिवार बहुत गरीब है और वह अपने पुश्तैनी धंधे को नया रूप देकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है। उसकी पत्नी कटंगी में छोटी सी दुकान लगाकर मिट्टी के कुकर, कढ़ाही, तवा अन्य बर्तन व सजावट का सामान बेचती है। उसे अपने इस व्यवसाय से हर माह 15 हजार रुपये की आय हो जाती है, जिससे वह अपना गुजारा चलाता है। उसके बनाये मिट्टी के बर्तन बैंगलोर, रायपुर व राजस्थान के लोगों ने भी ले गये है और उससे अधिक मात्रा में बर्तन सप्लाय करने कह रहे है।
मुरलीधर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन पूंजी की समस्या बाधा बनकर खड़ी हो जाती है। उसने बताया कि उसे इलेक्ट्रीक चाक, पेंटिंग के लिए कम्प्रेसर मशीन व रंगाई व चित्रकारी के लिए डाय मिल जाये तो वह अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकता है। उसने शासन की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऋण के लिए आवेदन भी किया है। जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र बालाघाट से उसका 9 लाख 50 हजार रुपये का प्रकरण मंजूर भी हो गया है। लेकिन कटंगी की बैंक उसे ऋण नहीं दे रही है। कटंगी के बैंक में उसका आवेदन दो माह से रखा है। मुरली कहता है कि उसे 5 लाख रुपये का भी ऋण मिल जायेगा तो एक वाहन लेकर मिट्टी के कुकर व कढाही को शहरों में बेच सकता है। वह कहता है कि वह बैंक का पूरा पैसा वापस कर देगा, लेकिन ऋण नहीं मिलने से वह मायूस है।

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