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अलविदा अरुण जेटली: BJP मुख्यालय लाया जा रहा पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया है। वह 66 वर्ष के थे।  वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।एम्स ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे बेहद दुख के साथ सूचित कर रहे हैं कि 24 अगस्त को 12 बजकर 7 मिनट पर माननीय सांसद अरुण जेटली अब हमारे बीच में नहीं रहे। अरुण जेटली को 9 अगस्त को एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। जेटली के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर है। बीते साल उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था लेकिन लगातार उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था।

जेटली का रविवार को निगमबोध घाट पर होगा अंतिम संस्कार 
जेटली का पार्थिव शरीर एम्स से उनके ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित आवास पर ले जाया गया है। जेटली का रविवार दोपहर निगमबोध घाट में अंतिम संस्कार किया जाएगा। भाजपा नेता सुधांशु मित्तल ने यह जानकारी दी।  उनका कुछ सप्ताह से अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह नौ अगस्त को एम्स में भर्ती हुए थे। एम्स में औपचारिकताओं के बाद जेटली के पार्थिव शरीर को उनके कैलाश कॉलोनी स्थित आवास पर ले जाया जाएगा। रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर भाजपा मुख्यालय ले जाया जाएगा जहां राजनीतिक दलों के नेता उन्हें अंतिम विदाई देंगे। भाजपा मुख्यालय से पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए निगमबोध घाट ले जाया जाएगा। उनके निधन से शोकाकुल भाजपा के मुख्यालय में पार्टी का झंडा आधा झुका दिया गया है।

अचानक बिगड़ गई थी जेटली की तबीयत
डॉक्टर ने बताया कि जेटली की तबीयत अचानक रात को बिगड़ गई थी। देर रात उनके पेट में संक्रमण फैल गया था। काफी मशक्कत के बाद भी डॉक्टर उनकी रिकवरी करने में नाकामयाब रहे। सुबह कई टेस्ट करने और हैवी डोज देने के बावजूद भी उनका शरीर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था।

बीते दिनों वरिष्ठ नेताओं ने जाना था जेटली का हाल
बीते दिनों उनसे मिलने भाजपा के वरिष्ठ नेता एल के आडवाणी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और भाजपा सांसद मेनका गांधी ने सोमवार को अस्पताल जाकर जेटली का हालचाल जाना था।

भाजपा के ‘थिंक टैंक’ थे जेटली
भाजपा के ‘थिंक टैंक’ के रूप में मशहूर अरुण जेटली ने दिल्ली विश्विद्यालय के छात्र आंदोलन से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और करीब चार दशक तक भारतीय राजनीति में छाये रहे। इसके अलावा उन्होंने वित्त मंत्री के तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान की। अठाईस दिसंबर 1952 को नयी दिल्ली में जन्में जेटली न केवल एक चर्चित वकील रहे बल्कि वह संसद में सरकार के ‘संकट मोचक’ वक्ता के रूप में भी जाने जाते थे। वर्ष 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित होने के बाद उन्हें आपातकाल के दौरान जेल में भी रहना पड़ा और इसके बाद धीरे-धीरे वह राजनीतिक की सीढि़या चढ़ते हुए शीर्ष पर पहुंच गये। उन्होंने केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रालयों का प्रभार संभाला और वर्ष 2014 से 2019 तक भारत के वित्त एवं कॉर्पोरेट मामालों के मंत्री रहे।

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