Road Construction Scam: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी नई सड़क, ग्रामीणों ने घेरा तो लीपापोती कर भागे अधिकारी; जानें पूरा मामला”
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर : केल्हारी क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. बुलाकीटोला ग्राम पंचायत से पसौरी गांव होते हुए मध्य प्रदेश सीमा तक बनाई गई साढ़े चार किलोमीटर सड़क पर 2 करोड़ 4 लाख 46 हजार रुपये खर्च होने का दावा किया गया है.
15 दिनों में ही उखड़ी सड़क
सड़क को बने अभी सिर्फ 15 दिन ही हुए हैं, लेकिन सड़क की हालत देखकर लगता है कि यह सालों पुरानी सड़क है. गिट्टियां उखड़ी हुई हैं, डामर बिखरा पड़ा है और सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है.
अफसरों पर धमकाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है. जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो समस्या दूर करने के बजाए उन्हें डराया और धमकाया गया. ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने साफ कह दिया सड़क बिल्कुल ठीक है.
सड़क बने अभी ज्यादा दिन नहीं हुआ है.आप भी वीडियो बनाकर देख लिजिए कि सड़क कितने घटिया तरीके से बनाया गया है.सड़क कई जगह से उखड़ चुकी हैं-धर्मेंद्र कुमार, ग्रामीण
तीन माह पहले से चल रहा था निर्माण
ग्रामीणों की माने तो सड़क को बनते हुए तीन महीना बीत चुका है.लेकिन डामरीकरण हाल ही में हुआ है.जो भी डामरीकरण हुआ है वो काफी घटिया तरीके से हुआ है.
मैंने इस सड़क के निर्माण की शिकायत कलेक्टर से की थी.उसके बाद जांच तो हुआ लेकिन जिम्मेदारों पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई.यहां के जो सब इंजीनियर हैं पटेल उन्होंने ठेकेदार के साथ मिलकर घटिया निर्माण कराया है- राज कुमार पूरी, ग्रामीण
वहीं सड़क को लेकर सरपंच ने कहा कि अफसरों से शिकायत के बाद जो जांच अधिकारी आए वो लीपापोती करके चले गए.सरपंच संतलाल ने कहा कि इस सड़क को बने 10 से 12 दिन हुआ है.लेकिन काम गुणवत्ताहीन हुआ है.
इस सड़क को लेकर हम लोग एसडीएम मैडम की मदद से मांग किए थे कि इस काम को सुधारा जाए.इसके बाद पटेल जी आए सब इंजीनियर साहब उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि आप लोग चिंता ना करें मैं काम अच्छे तरीके से करवाऊंगा.आप लोग धरना प्रदर्शन मत किजिए काम अच्छा होगा.लेकिन वो भी लीपापोती करके चले गए. पूरी तरह से भ्रष्टाचार हुआ है- संतलाल,सरपंच
मीडिया ने जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करना चाहा लेकिन किसी ने भी कैमरे के सामने आकर जवाब देना जरूरी नहीं समझा. फोन या तो बंद मिले या फिर कॉल रिसीव ही नहीं की गई.ग्रामीणों मांग है कि इस सड़क की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और सड़क का दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए.
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