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जंगली हाथियों के आतंक से मिलेगी मुक्ति! जिला प्रशासन की बैठक में बड़ा फैसला, इंसानी जान बचाने के लिए इन उपायों पर बनी सहमति

गढ़वाः पूरा झारखंड इन दिनों जंगली हाथियों के हमले का दंश झेल रहा है, गढ़वा जिला भी इससे अछूता नहीं है. गढ़वा सहित पूरे झारखंड में अबतक सैंकड़ों लोगों की जान चली गई है जबकि हाथियों के झुंड को भी नुकसान पहुंचा है.

जिला के विभिन्न क्षेत्रों में जंगली हाथियों के बढ़ते प्रकोप से उत्पन्न समस्याओं के समाधान तथा वनाधिकार से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक के दौरान जिला के संवेदनशील एवं प्रभावित क्षेत्रों में हाथी-मानवीय संघर्ष की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई.

इस क्रम में जन-धन की क्षति, फसलों एवं आवासों को होने वाले नुकसान और इन समस्याओं के स्थायी एवं प्रभावी समाधान को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया. साथ ही, हाथियों के सुरक्षित विचरण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं, जनजागरूकता अभियानों तथा त्वरित राहत एवं नियंत्रण उपायों पर भी चर्चा की गई. बैठक का मुख्य उद्देश्य वन एवं मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करते हुए जनहित में ठोस एवं व्यवहारिक निर्णय लेना रहा, ताकि भविष्य में हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके.

इस मौके पर डीसी ने कहा कि गढ़वा सहित इन दिनों पूरे राज्य में जंगली हाथियों का मूवमेंट ज्यादा हो गया है. अक्सर देखा जाता है कि जंगली इलाकों में बिजली की तार के संपर्क में आने से उनकी मौत हो रही है. वहीं जंगली इलाकों में कई इंसानों को भी जंगली हाथियों के द्वारा मारा गया है. जिसको लेकर एक टीम बनाई गयी है.

डीसी दिनेश यादव ने बताया कि इस बैठक में अंचल अधिकारी, वन विभाग और संबंधित अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक के माध्यम से इस मुद्दे पर जोर दिया गया कि अक्सर बिजली की नंगी तारों के संपर्क में आने से जंगली हाथियों की मौत होती है. इसके लिए अभियंता का निर्देशित किया गया है कि बिजली के तारों की ऊंचाई को सुनिश्चित करें, जिससे हाथी उन तारों से गुजर न सके या उनके संपर्क में न आ सकें. इसके साथ ही घनी आबादी और रिहायशी इलाकों में हाथी घुस आते हैं. ऐसे में उनसे बचाव या उन्हें दूर भगाने के लिए प्रभावित इलाके के लोगों के बीच मिर्च पाउडर, टॉर्च लाइट समेत अन्य सामग्री वितरण के लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है. इसके अलावा गढ़वा डीसी ने जनता से भी सजग रहने की अपील की है.

वहीं डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बैठक के संबंध में बताया कि हाथी और मानवीय संघर्ष को लेकर जिला स्तर पर एक बैठक का आयोजन किया गया. इसमें मानव और हाथियों के बीच होने वाले द्वंद्व विषय पर विस्तार से चर्चा की गयी. इसमें सरकार और विभाग के द्वारा क्या-क्या उपाय किया जा सकता है, साथ अन्य विभागों के साथ मिलकर क्या उपाय किए जा सकते हैं. इस पर भी विचार किया गया. साथ ही करंट से हाथियों की मौत के आंकड़े को कम करने और बिजली के तारों से हाथियों को बचाने के लिए बिजली और वन विभाग क्या उपाय कर सकती है, इस बात पर बल दिया गया.

वहीं डीएफओ ने कहा कि हाथियों के बचाव और हाथियों से मानव जीवन की रक्षा के लिए डीसी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी की देखरेख में जहां बिजली विभाग के द्वारा कार्य किया जाएगा. वहीं वन कर्मियों के द्वारा लोगों के बीच हाथी से बचाओ और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक जागरूकता फैलाई जाएगी.

पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने जंगली हाथी और नीलगाय को लेकर होने वाली समस्या को रेखांकित किया. सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वन विभाग की ओर समय-समय पर सार्थक प्रयास किया जाता है. जंगली हाथियों के हमले से मारे गये लोगों के मुआवजे को लेकर सांसद ने कहा कि मुआवजे का प्रावधान है जिसे प्रक्रिया के तहत दिया जाता है. जंगली हाथियों के गांव में घुसने को लेकर सांसद ने कहा कि ऐसे उपाय किए जाएं कि जंगलों में हाथियों को प्रचुर मात्रा में भोजन और पानी मिले, जिससे वो घनी आबादी का रुख न कर सके. वैसे में अगर फिर भी हाथी गांवों में आते हैं तो उन्हें वहां से निकालने की व्यवस्था हो. पलामू सांसद ने कहा कि यह पूरे देश का मामला है हमारे यहां ज्यादा है. जिसको लेकर लोकसभा मे कई सांसदों ने और उन्होंने खुद इस मामले को उठाया है, जिस पर केंद्र सरकार गंभीर है.

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