Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी ... मुख्य मंत्री ने हॉलैंड के महान हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से की मुलाकात, पंजाब के खिलाड़ियों... Road Accident: जिस घर से उठनी थी बेटे की बारात, वहां से उठी पिता की अर्थी; शादी के कार्ड बांटने निकल... Indore Viral News: गले में वरमाला और शादी का जोड़ा पहन DM ऑफिस पहुंचा दूल्हा, बोला- 'दुल्हन कैसे लाऊ... Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में 'वास्तु दोष'? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी ... Kolkata Hospital Fire: कोलकाता के आनंदलोक अस्पताल में भीषण आग, खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज; पूरे... Kota British Cemetery: कोटा में हटेगा 168 साल पुराना 'विवादित' शिलालेख, भारतीय सैनिकों को बताया था '... Novak Djokovic Virat Kohli Friendship: विराट कोहली के लिए नोवाक जोकोविच का खास प्लान, भारत आकर साथ म... Salman Khan Vamshi Film Update: वामशी की फिल्म में सलमान खान का डबल रोल? हीरो के साथ विलेन बनकर भी म... Crude Oil Supply: भारत के लिए खुशखबरी! इराक और सीरिया का 15 साल से बंद बॉर्डर खुला, क्या अब और सस्ता...

High Court Decision: पुलिस कांस्टेबल को 20 साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने रद्द की सख्त सजा; विभाग को दिए बहाली के आदेश

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस के एक कांस्टेबल को हरियाणा बड़ी राहत देते हुए उस पर 20 पंजाब और उच्च न्यायालय वर्ष पूर्व लगाई गई कठोर विभागीय सजा को रद कर दिया है।

अदालत ने न केवल पांच वेतनवृद्धियों की स्थायी रोक को अवैध ठहराया, बल्कि राज्य सरकार को मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए हर्जाना व एरियर ब्याज सहित देने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और सतही कार्रवाई का उदाहरण | बताया है। याचिकाकर्ता नरेश कुमार

वरिष्ठ अधिकारी के साथ झगड़े के कारण सरकार ने रोक दी थी पांच वेतन वृद्धि ने 3 अक्टूबर 1989 को हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में सेवा ज्वाइन की थी। वर्ष 2002-03 में उनकी तैनाती पुलिस पोस्ट कलानौर में थी। हेड कांस्टेबल जसवंत सिंह के साथ उनके संबंध बिगड़ गए। 11 अप्रैल 2003 को दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें नरेश कुमार की आंख में गंभीर चोट आई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा। नरेश कुमार पर वरिष्ठ अधिकारी से दुव्यवहार करने और ट्रांसफर के बावजूद वजूद सरकारी मोटरसाइकिल थाने से ले जाने जैसे आरोप लगाए

गए। इन आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। विभागीय जांच में जांच अधिकारी ने पाया कि सरकारी मोटरसाइकिल रिकार्ड और लाग बुक के अनुसार थाने में ही मौजूद थी और उसे ले ले जाने का आरोप सही नहीं है। मेडिकल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह भी स्पष्ट हुआ कि झगड़े में चोट नरेश कुमार को लगी थी। जांच अधिकारी ने यहां तक कहा कि मोटरसाइकिल ले जाने की शिकायत हेड कांस्टेबल द्वारा खुद को बचाने के लिए दर्ज कराई गई प्रतीत होती है। इन तथ्यों के आधार पर जांच अधिकारी ने नरेश कुमार को दोनों मुख्य आरोपों में निर्दोष बताया और उलटे हेड कांस्टेबल की भूमिका पर सवाल उठाए।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.