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मराठाकालीन कुएं से मिली थीं मूर्तियां, गुप्त दरवाजे और तिजोरी…संभल के बाद चर्चा में सहारनपुर का ये मंदिर

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उत्तर प्रदेश के संभल में प्रशासन ने 46 साल पुराने मंदिर को खुलवाया है. मंदिर के पास कुएं से भगवान की मूर्तियां मिली हैं. हालांकि, कुएं से मूर्ति मिलने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले सहारनपुर में भी एक कुएं के अंदर से सैकड़ों वर्षों पुराने शंख, भगवान भोलेनाथ और हनुमान जी की मूर्तियां मिल चुकी हैं.

सहारनपुर के गोटेशाह की चुंगी पर स्थित गोटेश्वर महादेव मंदिर स्थित है. दिसम्बर 2020 में इस मंदिर को लेकर काफी हंगामा हुआ था. हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने प्राचीन मंदिर के आसपास कब्जा करके उसके रास्ते को बंद कर दिया है. हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने जिला प्रशासन से मंदिर को कब्जामुक्त करवाने की मांग की थी.

कुएं से मिलीं प्रतिमाएं

इसके बाद प्रशासन ने मंदिर के आस-पास के कब्जे को हटवाकर उसे हिंदू समाज के लोगों को पूजा-अर्चना के लिए सौंप दिया गया था. हिंदू समाज के लोगों ने वहां फिर से प्राणप्रतिष्ठा की और मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू की. कुछ महीने पहले जब इस मंदिर के परिसर में स्थित एक पुराने कुएं को खोदा जा रहा था तो वहा खुदाई के दौरान भगवान भोलेनाथ, हनुमान जी के साथ-साथ कई देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमाएं मिलीं. इसके अलावा कुएं से खुदाई के दौरान एक प्राचीन शंख भी मिला, जोकि आज भी बजता है.

‘शंख ओर प्रतिमाएं तीन सौ वर्षों पुरानी’

दावा किया जा रहा था कि ये शंख ओर प्रतिमाएं तीन सौ वर्षों पुरानी हैं. मंदिर कमेटी ने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने खुदाई को रुकवाकर ESI को इसकी सूचना दी. लेकिन दस महीने बीत जाने के बाद भी ESI की टीम ने अब तक मंदिर पहुंचकर अपनी जांच शुरू नहीं की.

‘कुआं मराठाकालीन है’

मंदिर कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि ये मंदिर ओर कुआं मराठाकालीन है. कई वर्षों तक इस मंदिर को दबाकर रखा गया था. मंदिर में हुई नक्काशी और कलाकृतियां बताती हैं कि ये मंदिर पौने दो सौ वर्ष पुराना है. मंदिर की गुंबद पर कई गुप्त दरवाजे बने हुए हैं. इन दरवाजों में गुप्त तिजोरी बनी है, ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इनका इस्तेमाल आक्रमणकारियों से बचने ओर मंदिर के आभूषण छुपाने के लिए किया जाता होगा.

यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि हमें समय रहते मंदिर पर कब्जा मिल गया था और अभी सिर्फ संभल ही नहीं, कई और शहरों में ऐसे मंदिर हैं, जो दबे हुए हैं. सरकार जल्द से जल्द उन सभी मंदिरों को ढूंढकर उन्हें कब्जामुक्त करवाए.

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