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पंजाब: 14 महीने-11 मर्डर और एक नारंगी दुपट्टा… सीरियल किलर को पुलिस ने कैसे दबोचा?

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पंजाब पुलिस के हत्थे चढ़े सीरियल किलर को लेकर खुलासा हुआ है. आरोपी ने 14 महीने में 11 हत्याएं किए जाना कुबूल किया है. इनमें 9 लोगों की हत्या गला दबाकर और 2 को पीट-पीटकर मार डाला गया था. पुलिस ने उसे नारंगी दुपट्टे और एक मोबाइल की मदद से गिरफ्तार किया. सीरियल किलर राम स्वरूप सोढ़ी ज्यादातर अपने शिकार ट्रक ड्राइवर, मजदूर या सड़क किनारे चाय बेचने वालों को बनाता था. पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेजा है.

मामला पंजाब के रोपड़ का है. यहां के निवासी मनिंदर सिंह की हत्या हुई थी. पुलिस को लाश के पास नारंगी रंग का दुपट्टा मिला. वहीं, मृतक का मोबाइल गायब था. काफी जांच पड़ताल और सर्विलांस की मदद से पुलिस हत्या के आरोपी राम स्वरूप उर्फ ​​सोढ़ी तक पहुंची. वह होशियारपुर के चौरा गांव का रहने वाला है. पुलिस ने उसे भरतगढ़ गांव से गिरफ्तार किया.

बनाता शारीरिक संबध और मांगता था पैसे

रोपड़ पुलिस ने मीडिया को बताया कि आरोपी राम स्वरूप ने पूछताछ के दौरान अन्य वारदातों के बारे में खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने पड़ोसी जिलों फतेहगढ़ साहिब और होशियारपुर में भी जांच शुरू की. आरोपी से पूछताछ की गई. उसने बताया कि वह लोगों से शारीरिक संबंध बनाने को कहता था और उनसे पैसे मांगता था. जब वह मना करते तो वह उनकी कथित तौर पर हत्या कर देता. उसने अधिकतर हत्याएं रोपड़, फतेहगढ़ साहिब और होशियारपुर में की.

नारंगी दुपट्टा की मदद से किया गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि वह वारदात के बाद मृतकों के मोबाइल और पैसे लूटकर फरार हो जाता. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों की हत्या हुई उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है. उनसे मिलकर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे जाएगी. साथ ही पड़ोसी जिले की पुलिस से भी मिलकर इसमें जांच की जाएगी. राम स्वरूप 19 अगस्त को रोपड़ में मनिंदर सिंह की हत्या कर फरार हो गया था. पुलिस को लाश के पास आरोपी का नारंगी दुपट्टा बरामद हुआ था.

एक साल की दुबई-कतर में मजदूरी

पुलिस ने बताया कि आरोपी राम स्वरूप सफाई कर्मी के तौर पर काम करता था. 2022 में उसकी पत्नी और बच्चों ने उसे छोड़ दिया था. पुलिस के मुताबिक, आरोपी राम स्वरुप ने हाई स्कूल के दौरान पढ़ाई छोड़ दी थी. वह साल 2005 में दुबई और कतर चला गया. वहां उसने मजदूरी की. एक साल बाद वह 2006 में वापस भारत आ गया और होशियारपुर में दिहाड़ी मजदूरी करने लगा.

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