भारत में एक राज्य ऐसा भी है जहां 68.12% बच्चे बौनेपन के शिकार हैं. जून 2025 के पोषण ट्रैकर के आंकड़ों के अनुसार बौनेपन का कारण दीर्घकालिक या बार-बार होने वाला कुपोषण हो सकता है, जिसका बच्चों के विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है. संसद में प्रस्तुत विभिन्न दस्तावेजों के विश्लेषण के अनुसार. 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 63 जिलों में बच्चे सबसे ज्यादा बौनेपन का शिकार हैं.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के जून 2025 के पोषण ट्रैकर पर आधारित आंकड़ों के अनुसार, बौनेपन के उच्चतम स्तर वाले सबसे अधिक प्रभावित जिलों में महाराष्ट्र का नंदुरबार (68.12 प्रतिशत), झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम (66.27 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश का चित्रकूट (59.48 प्रतिशत), मध्य प्रदेश का शिवपुरी (58.20 प्रतिशत) और असम का बोंगाईगांव (54.76 प्रतिशत) शामिल हैं.
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