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रूस से फिलीपींस तक हर दिन 60 भूकंप, रिंग ऑफ फायर में बढ़ी हलचल

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फिलिपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से कोहराम मचा है. पूरे देश में 69 लोगों के मारे जाने की खबर है. रूस के बाद फिलिपींस में आए भूकंप ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी है, जो रिंग ऑफ फायर की जद में हैं. पिछले एक साल में रिंग ऑफ फायर पर स्थित देशों में भूकंप के 21700 (हर दिन औसतन 60) झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप के ये सभी झटके 1.5 तीव्रता से अधिक के महसूस किए गए.

आखिर रिंग ऑफ फायर है क्या?

रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर को घेरने वाला एक भूकंपीय या ज्वालामुखी पट्टी है, जिसकी लंबाई करीब 40 हजार किलोमीटर है. भूकंप के अधिकांश झटके इसी इलाके में आते हैं. इसे रिम या पैसिफिक बेल्ट भी कहते हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 75 प्रतिशत ज्वालामुखी रिंग ऑफ फायर इलाके में ही स्थित हैं. अलेक्ज़ेंडर पी. लिविंगस्टन ने 1906 में इसके बारे में दुनिया को सबसे पहले बताया.

रिंग ऑफ फायर की जद में रूस, जापान, फिलिपींस, अमेरिका, ग्वाटेमाला, कनाडा, मेक्सिको जैसे 36 देश या आइसलैंड है. रिंग ऑफ फायर में करीब 10 टेक्टोनिक प्लेट सक्रिय है.

इनमें कैरिबियन प्लेट, ओखोट्स्क प्लेट, ज्वान डी फुका प्लेट, कोकोस प्लेट, साउथ अमेरिकन प्लेट, नॉर्थ अमेरिकन प्लेट, नाज्का प्लेट प्रमुख हैं.

यहीं पर क्यों लगते हैं भूकंप के ज्यादा झटके?

रिंग ऑफ फायर को टेक्टोनिक प्लेट का जंक्शन भी कहा जाता है. यहां आपस में टेक्टोनिक प्लेंटे एक दूसरे से टकराती है. कई फॉल्ट लाइन एक्टिव होने की वजह से रोज इस क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं.

दुनिया के 90 फीसद भूकंप इसी इलाके में दर्ज किए जाते हैं. WHO की मानें तो दुनिया में भूकंप से हर साल औसतन 40 हजार लोगों की मौत हो जाती है.

दरअसल विश्व स्वास्थ संगठन ने साल 1998 से 2017 तक को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि पूरी दुनिया में भूकंप की वजह से 7 लाख 50 हजार लोग मारे गए.

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