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कफ सिरप का खौफ खत्म: MP में जहरीली सिरप पीने वाले 200 बच्चे खतरे से बाहर, बड़ी राहत की खबर

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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से राहत भरी खबर सामने आई है. यहां कोल्ड्रिफ नाम की खांसी की दवा लेने वाले 200 से ज्यादा बच्चों की तलाश की गई, जो कि सुरक्षित पाए गए. इस जहरीली सिरप पीने की वजह से 22 बच्चों की मौत हो चुकी है. इन बच्चों को दवा लेने के बाद किडनी में संक्रमण हो गया था. इस घटना के बाद यह दवा को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.

इस मामले में डॉ. प्रवीण सोनी नाम के एक बाल रोग विशेषज्ञ को गिरफ्तार किया जा चुका है. यह डॉक्टर छिंदवाड़ा के परासिया इलाके में सरकारी अस्पताल में काम करता था और साथ ही निजी प्रैक्टिस भी करता था. उसने ही बच्चों को ये दवाई लिखी थी.

17 अगस्त से डॉ. प्रवीण ने जितनी भी बच्चों को दवाइयां लिखीं थी, सरकारी अधिकारियों ने उन सभी बच्चों की ट्रैकिंग की. जांच में पता चला कि डॉक्टर ने 5,200 मरीजों का इलाज किया था, जिसमें अधिकांश बच्चे थे.

176 पन्नों के रिकॉर्ड से पचा चला कि 200 बच्चों को कोल्ड्रिफ नाम की खांसी की दवा दी गई थी. अधिकारियों ने फिर बच्चों के परिजनों को फ़ोन कॉल करके जानकारी ली. राहत की ख़बर रही कि सभी बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित हैं.

अब क्या हो रहा है?

अधिकारी खांसी की बची हुई दवाइयों के बोतलों को जब्त कर रहे हैं. आशा वर्कर घर-घर जाकर बचे हुए सिरप की बोतलों को इकट्ठा कर रहे हैं. क़रीब 200 से ज्यादा लोगों की टीम इस काम में लगी हुई है.

क्या है पूरा मामला?

अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ नाम की खांसी की दवा के इस्तेमाल से कम से कम 22 बच्चों की मृत्यु हो गई. जांच में यह सामने आया कि इन मौतों का कारण किडनी फेल्योर था, जो कोल्ड्रिफ सिरप में मौजूद एक जहरीले रसायन डायएथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल से हुआ. डायएथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल औद्योगिक उपकरणों जैसे ब्रेक फ्लुइड और एंटीफ्रीज में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे दवाओं में इस्तेमाल करना अत्यंत ख़तरनाक और गैरकानूनी है.

इस मामले ने पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ा दी है. मध्य प्रदेश के अलावा केरल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने भी कोल्ड्रिफ सिरप के प्रयोग और बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए, राज्य सरकारें मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा कर चुकी हैं और प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही हैं.

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