Local & National News in Hindi

विवादों में मौलाना इस्हाक गोरा! बोले- ‘दूसरे धर्म की रस्मों में शामिल होना ईमान की कमजोरी’, वीडियो वायरल होने पर बवाल

3

इन दिनों सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा व जमीयत दावातुल मुसलिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा का एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में मौलाना ने धार्मिक सहिष्णुता और भाईचारे के नाम पर बढ़ती गलतफहमियों पर दो-टूक अंदाज में बात की है. उन्होंने कहा कि आज समाज में कुछ लोग दूसरों की धार्मिक रस्मों और पूजा-पाठ में भाग लेना ‘भाईचारे’ की निशानी मानने लगे हैं, जबकि यह न केवल इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है. बल्कि शरीअत की नजर में एक बड़ा गुनाह और ईमान की कमजोरी भी है.

वीडियो में मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा- धर्म हमें दूसरों की इज्जत करना सिखाता है, लेकिन दूसरों के धार्मिक तौर-तरीकों को अपनाना या उनके पूजा कार्यक्रमों में शरीक होना, असली भाईचारा नहीं, भाईचारा यह नहीं कि आप किसी को खुश करने के लिए अपने विश्वास की सीमाएं तोड़ दें, बल्कि भाईचारा यह है कि आप उनके साथ अच्छा व्यवहार करें, उनकी भलाई करें, और किसी को तकलीफ न पहुंचाएं, लेकिन जब दिल में कुछ और हो और जाहिर कुछ और किया जाए तो यह सच्चाई नहीं, बल्कि मुनाफिकत है.

मौलाना ने जोर देकर कहा- आज मुसलमानों को अपने धर्म और पहचान को लेकर जागरूक रहना चाहिए. दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना अच्छी बात है, लेकिन सम्मान और भागीदारी में बहुत फर्क़ है. इस्लाम ने हमें नर्मी, इंसाफ और आदर का सबक दिया है, लेकिन साथ ही यह भी सिखाया है कि इबादत और आस्था सिर्फ़ अल्लाह के लिए होनी चाहिए.

एक दूसरे की मदद करें

उन्होंने आगे कहा कि असली भाईचारा तब होता है जब समाज में इंसाफ और रहम हो, जब लोग एक-दूसरे की मदद करें, एक-दूसरे के दुख-दर्द को बांटें, और ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी को ठेस पहुंचे, लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपने धर्म की सीमाएं पार कर सिर्फ दिखावे के लिए किसी दूसरे धर्म की पूजा में हिस्सा लेता है, तो यह न तो भाईचारा है, न सहिष्णुता, बल्कि ईमान की कमजोरी और आत्मिक भ्रम है.

मौलाना ने यह भी कहा कि इस्लाम ने हमें स्पष्ट रूप से बताया है ‘लकुम दीनुकुम वलियदीन’ यानी ‘तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म और मेरे लिए मेरा धर्म’. इस आयत में साफ हिदायत दी गई है कि दूसरों के धर्म की इज्जत करो, लेकिन अपने धर्म पर मजबूती से कायम रहो.

असली भाईचारा क्या है?

कारी इस्हाक़ गोरा ने समाज से अपील की कि धर्म के नाम पर किसी तरह का दिखावा न करें. उन्होंने कहा- हमें अपनी सोच बदलनी होगी. भाईचारे का मतलब यह नहीं कि हम दूसरों की पूजा करें, बल्कि यह है कि हम उनके अधिकारों की रक्षा करें और उनके साथ इंसाफ करें, असली भाईचारा दिलों को जोड़ने से होता है, न कि आस्थाओं को मिलाने से.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.