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जातिगत भेदभाव पर रोहित पवार सख्त! प्रिंसिपल पर तुरंत निलंबन की कार्रवाई की मांग, कहा- ‘ऐसे लोगों के लिए जगह नहीं’

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के महासचिव रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार से पुणे के एक कॉलेज की प्रिंसिपल को राज्य की युवा एवं खेल नीति समिति से हटाने की मांग की है. पवान ने यह मांग एक पूर्व दलित छात्र की ओर से लगाए जातिगत पक्षपात के आरोपों के बीच उठाई है.

मॉडर्न कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स के पूर्व BBA छात्र ने जातिगत पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा था कि कॉलेज ने उसकी नौकरी कंफर्म करने वाली रिपोर्ट रोककर रखी थी. हालांकि, कॉलेज ने इन आरोपों को खारिज किया है और साफ किया कि उसने वह डॉक्यूमेंट्स उसके ब्रिटेन स्थित नियोक्ता को भेज दिया थे और छात्र की नौकरी नहीं गई. कॉलेज ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

रोहित पवार ने कॉलेज पर मनुवादी विचारधारा पर चलने का आरोप लगाया है और कॉलेज की प्रिंसिपल निवेदिता एकबोटे को राज्य सरकार की कोर कमेटी से हटाने की मांग की है. बता दें यह कमेटी युवाओं और खेलों के लिए नीतियां बनाती है.

मनुवादी विचारधारा और युवाओं का भविष्य

रोहित पवार ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर राज्य की खेल और युवा नीति बनाने वाली समिति में मनुवादी विचारधारा वाले और जातिवादी नफरत रखने वाले लोग होंगे, तो राज्य के युवाओं का भविष्य क्या होगा?” उन्होंने आगे कहा, “इस समिति में ऐसे लोग शामिल होने चाहिए जो विदेशों में नौकरी पाने के तरीकों पर काम करते हों, न कि ऐसे व्यक्ति जो जातिवादी द्वेष की वजह से युवाओं को विदेश में नौकरी के अवसर खोने का कारण बनते हो.”

विवादास्पद सदस्यों को हटाया जाए

पवार ने सरकार से मांग की है कि जातिवादी द्वेष रखने वाले समिति के सदस्य को तुरंत हटाए और इसका पुनर्गठन किया जाए. ताकि भविष्य में सभी को समान अवसर मिल सके और मनुवादी सोच को फैलने से रोका जा सके.

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