दिल्ली की हवा पर बीजेपी का दावा! नेता ने कहा- ‘अगले ढाई साल में सुधरेगी स्थिति’, प्रदूषण के लिए पिछली सरकारों को ठहराया जिम्मेदार
दिवाली होते ही दिल्ली का प्रदूषण चर्चा में आ गया है. दिल्ली की हवा काफी खराब हो गई है. वायु गुणवत्ता (AQI) बेहद खराब श्रेणी में आ गई है. इसे लेकर आम आदमी पार्टी (BJP) बीजेपी सरकार पर हमलावर हो गई है. हालांकि बीजेपी नेताओं ने कहा है कि पहले इस समय AQI का लेवल 600 पार कर जाता था, लेकिन इस बार 350 के आसपास है. साथ ही कहा कि दिल्ली को हवा को पूरी तरह से साफ करने में 2 से 2.5 साल लगेंगे.
आप के आरोपों पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि इन लोगों को शर्म नहीं आती है. इनके 11 साल का कार्यकाल अभी-अभी पूरा हुआ है. हम बार-बार कहते रहे हैं कि दिल्ली को स्वास्थ्य के अनुकूल और सांस लेने लायक बनाने में हमें 2-2.5 साल लगेंगे. इसके बावजूद, जिन लोगों ने दिल्ली को प्रदूषित किया, वही लोग इस तरह के बयान देते हैं तो मुझे हंसी आती है. अभी ग्रीन पटाखों से दिवाली मनाई गई, दिल्ली वालों में खुशी है. जो AQI सितंबर में खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाता था, अक्टूबर में उससे नीचे है. हम इसे नियंत्रण में रखेंगे. सरकार भी तकनीक के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ तैयार है. हमें पूरा विश्वास है कि हम दिल्ली को अनुकूल स्थिति में रखेंगे.
वहीं बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हमने देखा है कि जब दिल्ली में AAP की सरकार थी, तब शहर का AQI 600 के पार चला जाता था. आज दिल्ली का AQI 350 के आसपास है. AAP के 10 साल के कुप्रबंधन के बाद आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐसे कदम उठाए हैं कि दिल्ली में पटाखे फोड़ने के बाद भी AQI का स्तर पिछले सालों के मुकाबले कम है. अगले साल इन्हीं दिनों में दिल्ली का वातावरण साफ होगा. ये हमारी गारंटी है.
दरअसल, आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए कहा था कि दिवाली के बाद हम आर्टिफिशियल रेन करवाएंगे जिससे प्रदूषण ठीक हो जाएगा. क्या ऐसा हुआ? नहीं, मेरा सवाल है कि अगर आप क्लाउड सीडिंग करवा सकते थे, तो क्यों नहीं करवाई? आप नेता ने बीजेपी सरकार पर पटाख लॉबी और प्राइवेट अस्पतालों के साथ सांठ-गांठ का भी आरोप लगाया.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण ब्यूरो (CPCB) के अनुसार, दिल्ली में मंगलवार सुबह 8 बजे एक्यूआई 352 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है. दिल्ली के 38 निगरानी केंद्रों में से 36 में प्रदूषण का स्तर रेड जोन में दर्ज हुआ.
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