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लद्दाख पर गृह मंत्रालय की हाई-लेवल बैठक! सांसद हनीफा ने मीटिंग के अंदर की बातों का किया खुलासा, क्या लिए गए अहम फैसले?

लद्दाख को लेकर बुधवार को गृह मंत्रालय में बैठक हुई, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधि शामिल थे. लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा जान दोनों संगठनों की तरफ से पैरवी करने वाले जनप्रतिनिधि के तौर पर इस बैठक में शामिल हुए.

मीटिंग के बाद हाजी हनीफा ने कहा कि स्टेटहुट और छठी सूची में शामिल किए जाने सहित तमाम मुद्दों पर बातचीत हुई. सोनम वांगचुक समेत अन्य गिरफ्तार लोगों की रिहाई को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई. अगली बैठक जल्दी ही फिर होगी. कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की तरफ से असगर अली करबलई, कमर अली अखून और सज्जाद कारगिली ने बैठक में हिस्सा लिया.

केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता लगभग तीन सप्ताह पहले रद्द कर दी गई थी. एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने कहा कि दिल्ली में गृह मंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने लद्दाख का दौरा किया, जिसके बाद वार्ता की तारीख तय की गई.

दोरजे ने कहा, केंद्र द्वारा 24 सितंबर की हिंसा की न्यायिक जांच की घोषणा के बाद, जो हमारी मुख्य मांग थी, हम वार्ता के लिए सहमत हुए हैं. अगर आगामी वार्ता में कोई सकारात्मक प्रगति होती है, तो अगले दौर की चर्चा नित्यानंद राय की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति के साथ होगी.

सरकार ने किया न्यायिक जांच का ऐलान

इससे पहले केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर को लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) की एक प्रमुख मांग को पूरा करने के लिए 24 सितंबर की झड़पों की उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की घोषणा की. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच उन परिस्थितियों की जांच करेगी, जिससे गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई, पुलिस कार्रवाई की गई और इसके परिणामस्वरूप 1999 के कारगिल युद्ध के एक अनुभवी सैनिक सहित चार लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई.

लेह-लद्दाख में क्या हआ था?

24 सितंबर को प्रदर्शनकारियों द्वारा इमारतों में तोड़फोड़, बीजेपी कार्यालय और एक पुलिस वाहन में आग लगाने और पुलिस व सीआरपीएफ द्वारा आंसू गैस के गोले दागने और गोलीबारी करने के बाद चार लोगों की मौत हो गई और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में भूख हड़ताल के 15वें दिन राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांगों को लेकर झड़पें शुरू हुईं. सोनम वांगचुक पर रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया है और वे जोधपुर जेल में बंद हैं. केंद्र ने सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है,

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