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उज्जैन सिंहस्थ 2028: तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार! 7 जोन और 22 सड़कों के साथ बन रहा है मेला क्षेत्र का मास्टरप्लान

मध्य प्रदेश के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. सरकार की ओर से इस महापर्व को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए करोड़ों रुपये के विकास कार्य कर रहे हैं. शहर में सड़कों, पुलों और घाटों का निर्माण तेजी से हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. अनुमान है कि इस महाकुंभ में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे, जिसके मद्देनज़र कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

मुख्य रूप से सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना और कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना को सिंहस्थ की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सिंहस्थ मेला अधिकारी एवं संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना पर 614.53 करोड़ रुपये की लागत से कार्य हो रहा है. इसके अंतर्गत सेवरखेड़ी में एक बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे मानसून के दौरान 51 मिलियन घनमीटर जल को लिफ्ट कर सिलारखेड़ी जलाशय में संग्रहित किया जाएगा. परियोजना का उद्देश्य वर्षा ऋतु में संचित जल का उपयोग कर शिप्रा नदी को वर्षभर प्रवाहमान बनाए रखना है. इससे सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं के स्नान हेतु पर्याप्त और स्वच्छ जल उपलब्ध रहेगा.

इस परियोजना में ग्राम सेवरखेड़ी में 1.45 मिलियन घनमीटर क्षमता का बैराज बनाया जा रहा है, जिससे 3 मीटर व्यास की 6.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से जल सिलारखेड़ी जलाशय तक पहुंचाया जाएगा. वहीं, 1.8 मीटर व्यास की 7 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन द्वारा आवश्यकता अनुसार यह जल वापस शिप्रा में छोड़ा जाएगा. परियोजना को 30 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 5 वर्ष तक संचालन और रखरखाव का प्रावधान भी शामिल है.

शिप्रा नदी को कैसे रखा जाएगा साफ?

ॉइसके साथ ही कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है. इसका उद्देश्य शिप्रा नदी को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखना है. इसके तहत कान्ह नदी को डाइवर्ट कर उससे निकलने वाले अशुद्ध जल को शिप्रा में मिलने से रोका जाएगा. इस योजना में लगभग 30 किलोमीटर लंबी भूमिगत नहर (कट एंड कवर पद्धति से) बनाई जा रही है. इसके लिए चार बड़े शाफ्ट (कुआंनुमा संरचनाएं) तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे जेसीबी और डंपर जमीन के अंदर जाकर नहर की सफाई कर सकेंगे.आगामी सिंहस्थ में 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता से स्नान की सुविधा मिल सके. पैदल आवागमन कम करने के लिए एमआर 22 रोड तैयार किया जा रहा है, जो अधिकांश घाटों को जोड़ेगा. वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए दत्त अखाड़ा घाट के पास हेलीपैड बनाया जा रहा है, जिससे वे सीधे रंजीत हनुमान या त्रिवेणी क्षेत्र के घाटों तक पहुंच सकेंगे. संपूर्ण मेला क्षेत्र को 7 जोन में विभाजित किया जाएगा—दत्त अखाड़ा में 3, महाकाल क्षेत्र में 1, मंगलनाथ क्षेत्र में 2 और कालभैरव क्षेत्र में 1 जोन.

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