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वोटर लिस्ट में नाम नहीं? अब टेंशन फ्री! चुनाव आयोग ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए जारी किए नए और आसान नियम

चुनाव आयोग की ओर से नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) प्रक्रिया का पहला चरण ज्यादातर राज्यों में पूरा हो गया है और कुछ राज्यों में जल्द समाप्त होगा. कई राज्यों में पहले चरण के तहत ड्राफ्ट लिस्ट जारी की गई है और सुनवाई और दस्तावेज के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है. जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं या उनके फॉर्म में कुछ असंगति आ रही है तो उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है और उनसे डॉक्यूमेंट सत्यापन के लिए कहा जा रहा है.

डॉक्यूमेंट सत्यापन को लेकर मतदाताओं के एक वर्ग में चिंता है. इसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने की ओर जल्द प्रक्रिया पूरा करने के लिए 4 सूत्रों एजेंडा जारी किया गया है.

चुनाव आयोग ने जारी किया चार सूत्री एजेंडा

इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारी को 24 दिसंबर को भेजे गए निर्देश में चार सूत्रों एजेंडा को ‘सख्ती से पालन’ करने को कहा है. आइए जानें चुनाव आयोग की ओर से क्या निर्देश दिए गये हैं-

  1. इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) द्वारा वोटर्स को नोटिस जारी किए जाने के मामलों में, जहां वोटर्स को पिछले SIR में मैपिंग सहित एलिजिबिलिटी दिखाने के लिए तय डॉक्यूमेंट्स जमा करने की जरूरत हो सकती है, ऐसे सभी एडिशनल डॉक्यूमेंट्स ERO जांच के लिए BLO ऐप के जरिए अपलोड करने होंगे.
  2. चुनाव आयोग ने कहा है कि डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर्स (DEOs) को ECINET पर मिलने के दिन से पांच दिनों के अंदर ऐसे सभी डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई करने होंगे.
  3. अगर किसी सरकारी अथॉरिटी ने उसी राज्य से, लेकिन दूसरे जिले से डॉक्यूमेंट जारी किए हैं, तो जिला चुनाव अधिकारी (DEO) को इसे ECINET के जरिए संबंधित DEO को भेजना चाहिए, ताकि वो इसे वेरिफाई कर सके.
  4. अगर वोटर ने राज्य के बाहर की अथॉरिटी से जारी डॉक्यूमेंट जमा किए हैं, तो DEO को ऐसे मामलों को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के जरिए संबंधित राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को भेजने के लिए कहा गया है, और तुरंत वेरिफिकेशन का अनुरोध किया गया है.

कम होगी वोटर्स की चिंता

चुनाव आयोग के इन कदमों से वोटर, खासकर उन लोगों की चिंता कम होने की उम्मीद है, जिनके डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई किए जानें हैं. ऐसे लाखों मामले अब नोटिस के लिए भेजे जा रहे हैं, जिनमें वेरिफिकेशन और ‘सुनवाई’ के लिए और डॉक्यूमेंट मांगे जा रहे हैं. SIR की तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से केवल उत्तर प्रदेश को छोड़कर सभी ने अपने ड्राफ़्ट रोल पब्लिश कर दिए हैं. उत्तर प्रदेश में छह जनवरी को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन होगा.

मौत, घर बदलने और रोल में कई एंट्री की वजह से मतदाता सूची से नाम हटना कई राज्यों में चिंता का विषय रहा है. जिनका पता बदला हुआ है और जिनके नाम कई बार आए हैं, साथ ही जिनके पिछले रिकॉर्ड या डॉक्यूमेंट्स में कमी पाई गई है, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और खास पहचान और नागरिकता के डॉक्यूमेंट्स के साथ सुनवाई के लिए पेश होने को कहा जाएगा.

तमिलनाडु में सबसे ज्यादा कटे वोटर्स के नाम

अब तक, चुनाव वाले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए हैं, जहां SIR से पहले के 6.4 करोड़ लोगों के वोटर लिस्ट में से 97 लाख नाम हटाए गए हैं, इसके बाद गुजरात (73 लाख) और पश्चिम बंगाल (58 लाख) का नंबर आता है.

इस प्रोसेस में अब तक 12 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में से 11 के 51 करोड़ वोटर्स में से 36 करोड़ को कवर किया गया है और इसके नतीजे में 3.7 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं, हालांकि अभी यूपी का ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होना बाकी है. इसके बाद संख्या में और भी इजाफा होने के आसार हैं.

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