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दादी-नानी के नुस्खे: गाजर-मूली का परफेक्ट अचार बनाने की सीक्रेट ट्रिक, इन गलतियों से बचा लिया तो कभी नहीं पड़ेगा काला

सर्दियों के दिनों में अगर गाजरमूली का अचार न बनाया तो ये फिर ऑफ सीजन लगता है कि अचार बना ही लेते तो सही रहता है. ज्यादातर भारतीय घरों में विंटर सीजन में बनने वाला ये सबसे पॉपुलर अचार है जो खूब पसंद किया जाता है और बनाना भी काफी आसान होता है. इस मौसम में आने वाली गाजर में नेचुरल मिठास होती है तो वहीं मूली इसे बैलेंस करने का काम करती है. कई तरह के मसालों के साथ गाजर-मूली के अचार का स्वाद बेहतर होता है. अक्सर देखने में आता है कुछ लोगों को ये शिकायत रहती है कि उनके हाथों का अचार खराब हो जाता है. दरअसल इसके पीछे कुछ कॉमन गलतियां हो सकती हैं.

मूली-गाजर के अचार के स्वाद का खासियत ये होती है कि ये सब्जियां मसालों के साथ मिलकर वाइब्रेंट टेस्ट के साथ ही क्रंची भी लगती हैं और सर्दी की गुलाबी धूप में अचार धीरे-धीरे पकता जाता है, जिससे इसका टेस्ट इनहैंस होता है. इस मौसम की सब्जियों को दूसरे मौसम में भी खाना हो तो अचार बनाना एक बेहतरीन तरीका है. फिलहाल जान लेते हैं कि गाजर-मूली का अचार बनाते वक्त कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए.

सब्जियां सही न सुखाना

ये बहुत जरूरी है कि आप गाजर और मूली को सही से सुखाएं. कई लोग तो सीधे सब्जियां काटकर अचार बना देते हैं. दअरसल जब आप मूली या फिर गाजर को सही से धूप में नहीं सुखाते हैं तो इसमें मौजूद नमी की वजह से अचार पर फफूंद जल्दी आ जाती है.

गाजर-मूली सही से न काटना

अगर आप गाजर और मूली का अचार डाल रहे हैं तो ध्यान रखें कि दोनों सब्जियों के टुकड़े बिल्कुल बराबर मोटाई में काटें. कई बार हम कुछ टुकड़े मोटे तो कुछ पतले काटते हैं. इससे जब आप अचार को धूप में रखते हैं तो कुछ अचार ज्यादा गल जाता है तो कुछ सही से नहीं गलता है, जिससे अचार के स्वाद में फर्क आ जाता है.

मूली सही से सेलेक्ट न करना

ये बहुत जरूरी है कि आप मूली को सही से सेलेक्ट करें. बहुत ज्यादा मोटी मूली का अचार सही नहीं बनता है, क्योंकि कई बार इसमें अंदर जाली पड़ जाती है. कई बार आपने जब मूली काटी होगी तो देखा होगा कि उसके बीच में कुछ हिस्सा ऐसा होता है जो थोड़ा ज्यादा सफेद दिखता है और सख्त होता है. ऐसी मूली का अचार सही नहीं रहता है. मीडियम साइज की मूली लेना बेस्ट रहता है.

ये मसाले ज्यादा डाल देना

मूली-गाजर के अचार में दो मसाले कम डालने चाहिए. अगर आप हींग थोड़ी भी ज्यादा कर देते हैं तो इससे सारे मसालों का स्वाद दब जाता है. इसी तरह से मेथी दाना भी गुणों की खान होता है और ये अचार के मसाले में जरूर एड किया जाता है, लेकिन गाजर-मूली का अचार बना रहे हैं तो मेथी दाना कम डालें, नहीं तो अचार में कड़वाहट आ जाती है. ज्यादा हींग की वजह से डाइजेशन खराब हो सकता है. दरअसल जब पेट में गैस बनती है या फिर कब्ज की शिकायत रहती है तो हींग दी जाती है ताकि मल त्याग हो सके और अगर इसका ज्यादा सेवन किया जाए तो दस्त हो सकते हैं.

ये गलती बना देगी बीमार

कई बार अचार में फफूंद लग जाती है तो लोग उतने अचार को हटाकर बाकी का खाने में यूज कर लेते हैं, लेकिन ये आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे आपका डाइजेशन बिगड़ सकता है. सांस संबंधी समस्या हो सकती है और इम्यूनिटी वीक है तो इससे इंफेक्शन भी हो सकता है.

ये बोनस टिप्स रखें याद

गाजर-मूली के अलावा भी आप किसी भी तरह का अचार डाल रहे हो तो ये ध्यान रखना चाहिए कि इसको धूप जरूर दिखाएं. प्लास्टिक की बजाय अचार को हमेशा कांच के जार में रखना सही रहता है. जब शुरुआत में अचार डाला हो तो डिब्बे या बरनी के मुंह पर ढक्कन लगाने की बजाय आपको सूती कपड़ा बांधना चाहिए. किसी भी तरह से अचार में नमी नहीं लगने देना चाहिए.

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