ब्रेकिंग
छिंदवाड़ा में ठहाकों का 71वां साल! जब कवियों के व्यंग्य बाणों के सामने नेता भी हुए बेबस, प्रेमिका पर... Jabalpur News: जबलपुर में रजिस्ट्री और लीज का अजब-गजब खेल, अंग्रेजों के पुराने कानून से जनता बेहाल BJP Leader Death: एंबुलेंस के फर्श पर तड़पते रहे खून से लथपथ बीजेपी नेता, इलाज के दौरान मौत; ड्राइवर... MP News: सीधी के फाग गीतों में चढ़ा राजनीति का रंग, पीएम मोदी और स्थानीय सांसद पर लोक गायकों ने बांधे... दिल्ली वालों के लिए जरूरी खबर: राजघाट की ओर जाने वाले ये 5 मुख्य मार्ग प्रभावित, ट्रैफिक जाम से बचने... Bengaluru News: शादी के बाद पति के लिए छोड़ी नौकरी, फिर ससुराल में प्रताड़ना; बेंगलुरु में पूर्व महि... IND vs ENG Semifinal: वानखेड़े में इंग्लैंड से हिसाब चुकता करेगी टीम इंडिया? जानें सेमीफाइनल का पूरा... Bhooth Bangla: सेमीफाइनल से पहले अक्षय कुमार ने टीम इंडिया को दिया खास 'गुड लक', शिखर धवन के साथ की ... Punjabi Youtuber Killed in Canada: मशहूर यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की हत्या, हमलावरों ने घर में घुसकर ... ईरान हमले में भारत का नाम! क्या सच में अमेरिकी सेना ने किया भारतीय पोर्ट का उपयोग? विदेश मंत्रालय का...
देश

Al-Falah University Scam: फरीदाबाद की अल-फलह यूनिवर्सिटी का बड़ा फर्जीवाड़ा, ऐसे बनाया सिस्टम को बेवकूफ

ED का दावा है कि अल-फलह यूनिवर्सिटी ने सालों तक नियमों की अनदेखी कर शिक्षा के नाम पर बड़ा खेल खेला है. प्रवर्तन निदेशालय ने इस पूरे मामले में ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी और यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जो फिलहाल तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में है. ED की चार्जशीट के मुताबिक, अल-फलह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े कॉलेजों ने छात्रों और उनके परिवारों को मान्यता और फैकल्टी को लेकर गुमराह किया. जांच एजेंसी का कहना है कि NAAC ग्रेड, UGC की मंजूरी और मेडिकल कॉलेज से जुड़े नियम सिर्फ फाइलों और वेबसाइट तक सीमित थे.

चार्जशीट में आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने खुद को UGC की धारा 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त बताया. जबकि, जांच में सामने आया कि ना तो यूनिवर्सिटी इस सूची में थी और ना ही इसके लिए कभी आवेदन किया गया था. इसके बावजूद छात्रों से पूरे भरोसे के साथ एडमिशन और मोटी फीस ली गई.

फैकल्टी के लिस्ट में नाम, लेकिन कभी पढ़ाने नहीं आए

ED की जांच में मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा हुआ है. ED का दावा है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियम पूरे दिखाने के लिए डॉक्टरों की भर्ती सिर्फ रिकॉर्ड में की गई. कई डॉक्टरों को निरीक्षण से ठीक पहले रखा गया. कुछ ऐसे भी थे जिनका नाम फैकल्टी लिस्ट में तो था, लेकिन वे कॉलेज में कभी पढ़ाने आए ही नहीं. नाम सिर्फ ऑन पेपर था. यानी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई नहीं. सिर्फ कागजी खेल चलता रहा.

चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई. OPD और बेड ऑक्यूपेंसी ज्यादा दिखाने के लिए बिचौलियों के जरिए लोगों को मरीज बनाकर लाया गया. ED के मुताबिक, निरीक्षण के समय अस्पताल और कॉलेज को हड़बड़ी में सजाया जाता था, ताकि रेगुलेटरी बॉडी को सब कुछ सही लगे और जरूरी मंजूरी मिलती रहे.

ज्यादातर ट्रस्टी करीबी रिश्तेदार

ED का आरोप है कि इन झूठे दावों के आधार पर बड़ी संख्या में छात्रों से फीस वसूली गई.जब यूनिवर्सिटी की मान्यता और नियमों की स्थिति साफ नहीं थी, तो इसका सीधा असर छात्रों के करियर और भविष्य पर पड़ा. जांच में ये भी सामने आया कि अल-फलह चैरिटेबल ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके परिवार का पूरा नियंत्रण था. ट्रस्ट के ज्यादातर ट्रस्टी उसके करीबी रिश्तेदार हैं. चाहे फाइनेंस से जुड़े फैसले हों या प्रशासन से जुड़े, सब कुछ उसकी मंजूरी से होता था. ED ने उसे ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के बीच कॉमन कंट्रोलिंग अथॉरिटी बताया है.

मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान ED ने दिल्ली और हरियाणा में कई ठिकानों पर छापेमारी की. इन छापों में डिजिटल डिवाइस, अहम दस्तावेज और करीब 48.65 लाख रुपये नकद जब्त किए गए. ED का कहना है कि ये पैसा संदिग्ध लेन-देन और अवैध कमाई से जुड़ा हो सकता है. ED ने चार्जशीट में दावा किया है कि अल-फलह ग्रुप ने गलत जानकारी और फर्जी दावों के जरिए करीब 493 करोड़ रुपये कमाए. ये रकम स्टूडेंट्स के एडमिशन और फीस के नाम पर वसूली गई.

140 करोड़ रुपये की जमीन जब्त

इस मामले में ED ने करीब 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतें यानी लगभग 54 एकड़ को भी जब्त किया है. जांच दिल्ली पुलिस की एफआईआर के बाद शुरू हुई थी. चार्जशीट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट का पैसा जवाद सिद्दीकी के परिवार की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया. आमला एंटरप्राइजेज, कारकुन कंस्ट्रक्शन और दियाला कंस्ट्रक्शन जैसी फर्मों में 110 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम भेजी गई. इतना ही नहीं, जवाद सिद्दीकी ने करीब 3 करोड़ रुपये अपनी पत्नी और लगभग 1 करोड़ रुपये अपने बेटे को विदेश में ट्रांसफर किए. जांच में विदेश में इन्वेस्टमेंट और बिजनेस से जुड़े लिंक भी सामने आए हैं. ED का साफ आरोप है कि ये गलती नहीं, साजिश थी.

ED ने चार्जशीट में साफ कहा है कि ये मामला सिर्फ लापरवाही या कागजी गलती का नहीं है,फर्जी फैकल्टी, झूठी मान्यता, नकली रिकॉर्ड और पैसों का लेन-देन एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था. ताकि शिक्षा के नाम पर ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जा सके. फिलहाल कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है.

Related Articles

Back to top button