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Ratlam Dam Accident: रतलाम में पिकनिक मनाने गए दो छात्रों की डूबने से मौत, सिस्टम की लापरवाही आई सामने

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रतलाम: पिछले 2 दिनों में यहां पानी में डूबने से मौत की 2 घटनाएं सामने आई हैं. जिसने रतलाम जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. 2 अलग-अलग हुई घटनाओं में 1 युवक और 2 छात्रों की मौत हो चुकी है. मंगलवार सुबह पलसोढी के पास श्रीराम डैम में डूबे नौवीं कक्षा के 2 छात्र आशुतोष और ध्रुव की लाश एसडीआरएफ की टीम ने बरामद की है लेकिन यहां भी प्रशासन का असंवेदनशील रवैया सामने आया है.

2 घंटे के इंतजार के बाद निजी वाहनों से ले गए शव

डैम से दोनों छात्रों की लाश मिल जाने के 2 घंटे बाद भी जब एंबुलेंस और शव वाहन नहीं पहुंचे तो परिजन बच्चों के पोस्टमार्टम के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज तक निजी वाहन की व्यवस्था कर लेकर पहुंचे. मृतक बच्चे के परिजन ईश्वर लाल का आरोप है कि “मौके पर पुलिस और प्रशासन के कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं थे. 2 घंटे तक इंतजार करने के बाद शवों को निजी वाहनों से रतलाम मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे. यहां भी पोस्टमार्टम करवाने के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ा.”

वहीं, मालिनी नदी में डूबे 21 वर्षीय युवक पुष्कर की लाश 2 दिन बाद मिली है. जिसे लेकर परिजन और करणी सेना परिवार के जीवन सिंह शेरपुर ने प्रशासन के पास आपदा प्रबंधन के संसाधन नहीं होने के आरोप लगाए हैं.

मलेनी नदी में डूबने से एक युवक की मौत

पहली घटना मलेनी नदी पर मिंडाजी संगम स्थल पर हुई. जहां रविवार को छोटी नाव पलट जाने से 3 लोग नदी में गिर गए थे. 2 युवकों ने तैरकर अपनी जान बचा ली लेकिन एक युवक पुष्कर यहां नदी में डूब गया था. जिसका दूसरे दिन भी कोई पता नहीं चल सका था. मौके पर रेस्क्यू करने पहुंची जिला आपदा प्रबंधन की रेस्क्यू टीम और एसडीआरएफ की टीम द्वारा 2 दिनों तक युवक का पता नहीं लगा पाने की वजह से परिजनों और स्थानीय नेताओं ने नाराजगी व्यक्त की थी.

करणी सेना परिवार के जीवन सिंह शेरपुर रात में ही मौके पर पहुंचे थे और जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होने और रेस्क्यू कार्य ठीक से नहीं किए जाने के आरोप लगाए थे.

श्रीराम डैम में पिकनिक मना रहे 2 छात्र डूबे

सोमवार शाम पलसोड़ी स्थित श्रीराम डैम में दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गए नौवीं कक्षा के 2 छात्र नहाते समय गहरे पानी में डूब गए. सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची लेकिन मंगलवार सुबह तक इन छात्रों का कोई पता नहीं लग सका था. सुबह करीब 8:00 बजे दोनों के शव एसडीआरएफ की टीम ने बरामद किए. लेकिन मौके पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे और ना ही कोई एंबुलेंस या शव वाहन पहुंचा.

‘शवों को ले जाने प्रशासन का कोई इंतजाम नहीं’

दोनों बच्चों के परिजन करीब 2 घंटे तक इंतजार करने के बाद निजी वाहनों से शव लेकर रतलाम मेडिकल कॉलेज पहुंचे. मृतक छात्र के परिजन ईश्वर लाल सिंगाड़ ने बताया कि “बच्चों के डूबने के बाद से ही प्रशासन के अधिकारियों का असंवेदनशील रवैया देखने को मिला. एसडीआरएफ के गोताखोर मंगलवार सुबह पहुंचे और बच्चों की लाशों को निकाला जा सका.

सुबह मौके पर कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया एक दो पुलिस वालों को छोड़कर. लाशों को लाने के लिए कोई एंबुलेंस या शासकीय वाहन की व्यवस्था भी नहीं मिली. जिसके बाद निजी वाहन किराए से करके बच्चों के शव लेकर आए हैं. मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद भी पोस्टमार्टम के लिए इंतजार करना पड़ा.”

इस मामले में तहसीलदार मनोज चौहान ने बताया कि “बच्चों के डूबने की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा था. दोनों बच्चों के शव मिलने के बाद उनका पोस्टमार्टम मेडिकल कॉलेज में करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए.

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