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Israel-Jordan Tension: फिलिस्तीन के बाद अब जॉर्डन की बारी? इजराइल के रडार पर क्यों है अम्मान, जानें वजह

वेस्ट बैंक में इजराइल की हालिया नीतियों ने जॉर्डन में चिंता की लहर पैदा कर दी है. अम्मान के सियासी और सुरक्षा हलकों में अब खुलकर चर्चा हो रही है कि क्या फिलिस्तीनियों को धीरे-धीरे जॉर्डन की ओर धकेलने की पुरानी सोच जमीन पर उतर रही है. सवाल है कि क्या वेस्ट बैंक के बाद अब जॉर्डन अगला दबाव झेलने वाला देश है?

दरअसल इजराइली कैबिनेट ने वेस्ट बैंक की बड़ी जमीनों को राज्य भूमि के रूप में दर्ज करने का फैसला किया है. अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब यह प्रक्रिया सीधे इजराइल के न्याय मंत्रालय के तहत होगी. इजराइल के वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने इसे बस्तियों के विस्तार की दिशा में अहम कदम बताया है.

जॉर्डन को क्या डर है?

जॉर्डन को डर है कि इससे पुराने उस्मानी और जॉर्डन काल के भूमि रिकॉर्ड कमजोर पड़ सकते हैं, जो अब तक फिलिस्तीनियों के संपत्ति अधिकारों की कानूनी ढाल रहे हैं. अगर ये रिकॉर्ड अप्रासंगिक हो गए, तो बस्तियों का विस्तार तेज होगा और स्थानीय आबादी पर दबाव बढ़ेगा.

सॉफ्ट ट्रांसफर की आशंका

अम्मान की चिंता सिर्फ टैंकों और सैनिकों को लेकर नहीं है. असली डर उस माहौल से है जिसमें वेस्ट बैंक को रहने लायक न छोड़ा जाए. लगातार सैन्य अभियान, शरणार्थी कैंपों में कार्रवाई और आर्थिक मुश्किलें, इन सबके बीच यह आशंका जताई जा रही है कि लोगों को धीरे-धीरे जॉर्डन की ओर पलायन के लिए मजबूर किया जा सकता है. जेनिन और तुल्कारेम जैसे इलाकों में बढ़ती सख्ती ने जॉर्डन के सुरक्षा तंत्र को सतर्क कर दिया है. अगर बड़ी संख्या में लोग सीमा की तरफ बढ़ते हैं, तो हालात तेजी से बदल सकते हैं.

1994 की शांति संधि पर सवाल

जॉर्डन और इजराइल के बीच 1994 में हुई Wadi Araba Treaty लंबे समय से क्षेत्रीय स्थिरता की बुनियाद मानी जाती रही है. लेकिन जॉर्डन में अब यह धारणा मजबूत हो रही है कि जमीनी हकीकत उस समझौते की भावना से दूर जा रही है. विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा इजराइली सरकार वेस्ट बैंक पर स्थायी नियंत्रण की दिशा में बढ़ रही है.

वहीं जॉर्डन भी तैयारी में जुट गया है. रिपोर्ट के मुताबिक जरूरत पड़ी तो इसे बंद सैन्य क्षेत्र घोषित करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं. हाल ही में जॉर्डन ने 35 साल बाद अनिवार्य सैन्य सेवा कार्यक्रम दोबारा शुरू किया है.

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