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ममता सरकार पर भड़कीं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी! राष्ट्रपति के अपमान पर जताया कड़ा ऐतराज, बोलीं- ‘देश की प्रथम नागरिक का अनादर बर्दाश्त नहीं’

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देवघरः अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को प्रख्यात किन्नर समाजसेवी और टीवी कलाकार लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी देवघर पहुंचीं. देवघर आगमन पर किन्नर समाज और संत समुदाय द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया. बहुचरा माता मंदिर परिसर में महामंडलेश्वर राजनंदनी गिरी के नेतृत्व में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में उन्हें सम्मानित किया गया.

देवघर पहुंचने के बाद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बाबा बैद्यनाथ धाम के ज्योतिर्लिंग के दर्शन की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि देवघर आकर वह बेहद प्रसन्न और भावुक हैं. उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की नगरी में आना उनके लिए सौभाग्य की बात है और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा हर किसी को आकर्षित करती है.

इस दौरान उन्होंने झारखंड सरकार से मांग करते हुए कहा कि राज्य में ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन जल्द से जल्द किया जाना चाहिए. जिससे किन्नर समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत मंच तैयार हो सके. उन्होंने कहा कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा.

वहीं पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति को लेकर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के सम्मान में इस तरह की अनदेखी की जाए. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति किसी एक राजनीतिक दल की नहीं बल्कि पूरे देश की होती हैं और उनके पद का सम्मान हर किसी के लिए अनिवार्य होना चाहिए.

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब देश के बड़े राजनीतिक चेहरे ही मर्यादा और सम्मान की सीमाओं को भूलने लगेंगे तो समाज में गलत संदेश जाएगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रति इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता.

इस कार्यक्रम में किन्नर अखाड़े की कई प्रमुख संत भी मौजूद रहीं. मां गायत्री नंदोगिरी, महामंडलेश्वर डॉ. वैश्णवी जगदंबा नंदगिरी और कालिंदी नंद गिरी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि किन्नर समाज स्त्री और पुरुष दोनों के गुणों का अर्ध रूप है, इसलिए महिला दिवस उनके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारत में महिला दिवस का असली अर्थ तभी पूरा होगा. जब देश के ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगी और घरेलू हिंसा तथा शोषण जैसी समस्याओं से मुक्त होंगी.

अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की मां पवित्रानंद गिरि, जो उज्जैन पीठ की महामंडलेश्वर भी हैं. उन्होंने भी अपने संबोधन में कहा कि एक तरफ पूरा देश महिला दिवस मना रहा है. वहीं दूसरी ओर देश की प्रथम नागरिक और एक महिला होने के बावजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान में कमी देखने को मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जब देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के प्रति ही सम्मान में कमी दिखाई जाएगी तो समाज के अन्य वर्गों में भी इसका गलत प्रभाव पड़ेगा.

इस कार्यक्रम में मौजूद संतों और समाजसेवियों ने झारखंड की महामंडलेश्वर राजनंदनी गिरी उर्फ रोज माता का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने देवघर जैसे पवित्र धार्मिक स्थल पर इतना बड़ा आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर किन्नर समाज को एक नया मंच प्रदान किया है. इस धार्मिक अनुष्ठान और विचार गोष्ठी के इस कार्यक्रम में किन्नर समाज के कई संत, समाजसेवी और श्रद्धालु मौजूद रहे.

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