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Darsh Amavasya 2026: दर्श अमावस्या आज! पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये 5 अचूक उपाय; घर में बरसेगी सुख-समृद्धि और शांति

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दर्श अमावस्या को पौष या माघ मास की अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन पितरों को याद कर उनका तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्मों से पितृ दोष कम होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है. इसके अलावा इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना भी बहुत शुभ माना जाता है, जिससे पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. आइए जानते हैं इस खास दिन पितरों की कृपा पाने के लिए क्या- क्या करना चाहिए.

दर्श अमावस्या 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, तिथि का प्रारंभ 18 मार्च 2026, सुबह 08:25 बजे से होगा, वहीं तिथि का समापन 19 मार्च 2026, सुबह 06:52 बजे पर होगा. इसलिए उदया तिथि के अनुसार , 18 मार्च, बुधवार को ही मुख्य पर्व मनाया जाएगा.

दर्श अमावस्या की पूजा विधि ( Darsh Amavasya Puja Vidhi)

पवित्र स्नान: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें.

सूर्य देव को अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और काले तिल डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें.

तर्पण और श्राद्ध: हाथ में जल और काले तिल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें.

दान-पुण्य: स्नान के बाद जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र या तिल का दान करना बेहद शुभ होता है.

पीपल पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

पितृ शांति के लिए करें ये विशेष उपाय

ब्राह्मण भोज: संभव हो तो इस दिन किसी ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन कराएं और दक्षिणा दें.

गाय और कुत्ते की सेवा: अमावस्या के दिन गाय, कुत्ते और कौवे को रोटी खिलाना न भूलें. इससे पितृ दोष कम होता है.

मंत्र जाप: ॐ पितृभ्यः नमः मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और पितरों की कृपा प्राप्त होती है.

दर्श अमावस्या के दिन क्या न करें?

  • इस दिन तामसिक भोजन यानी मांस, शराब आदि का भोजन नहीं करना चाहिए.
  • किसी का अपमान या विवाद न करें.
  • घर में नकारात्मक माहौल न बनने दें.

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