महंगाई का डबल अटैक! 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक महंगाई; खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन तक सब होगा महंगा, देखें नए आंकड़े

रिटेल महंगाई के बाद थोक महंगाई ने भी अपने तेवर दिखा दिए हैं. सोमवार को सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में थोक महंगाई फरवरी में 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. इसका प्रमुख कारण मैन्युफैक्चर्ड सामान और कुछ प्राइमरी प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा होना है. जबकि फ्यूल की कीमतें अभी भी नेगेटिव दायरे में देखने को मिली. होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) पर आधारित महंगाई फरवरी में बढ़कर 2.13 फीसदी हो गई, जो जनवरी में 1.81 फीसदी और दिसंबर में 0.96% थी. यह पूरे अर्थव्यवस्था में कीमतों में बढ़ोतरी के दबाव के धीरे-धीरे बढ़ने का संकेत है. महंगाई की यह पॉजिटिव दर मुख्य रूप से अन्य मैन्युफैक्चरिंग, बेसिक धातुओं के निर्माण, नॉन-फूड प्रोडक्ट्स, फूड प्रोडक्ट्स और कपड़ों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण थी.
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में इजाफा
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स — जिनका WPI बास्केट में सबसे अधिक वेटेज होता है — फरवरी में थोक महंगाई में बढ़ोतरी के सबसे बड़े योगदानकर्ता रहे. इस कैटेगिरी में महंगाई फरवरी में बढ़कर 2.92 फीसदी हो गई, जो जनवरी में 2.86 फीसदी और दिसंबर में 2.03 फीसदी से थोड़ी अधिक थी. खाद्य महंगाई फरवरी में बढ़कर 1.85 फीसदी हो गई, जबकि जनवरी में इसमें 1.41 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.
प्राइमरी प्रोडक्ट्स में इजाफा
प्राइमरी प्रोडक्ट्स – जिनमें कृषि उत्पाद और खनिज शामिल हैं – में महंगाई सालाना आधार पर फरवरी में तेजी से बढ़कर 3.27 फीसदी हो गई, जो जनवरी में 2.21 फीसदी और दिसंबर में केवल 0.21 फीसदी थी. सालाना बढ़ोतरी के बावजूद, इस श्रेणी में वास्तव में महीने-दर-महीने आधार पर 0.52 फीसदी की गिरावट देखी गई. यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं (1.33 फीसदी की गिरावट) और खनिजों (1.21 फीसदी की गिरावट) की कीमतों में कमी के कारण हुई, हालांकि इस महीने के दौरान कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 4.17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और नॉन-फूड प्रोडक्ट्स में 0.83 फीसदी की वृद्धि हुई.
फ्यूल और बिजली की कीमत
फ्यूल और बिजली की कीमतें, महीने-दर-महीने आधार पर थोड़ी रिकवरी के बावजूद, थोक महंगाई पर दबाव बनाए रहीं. इस कैटेगिरी में महंगाई फरवरी में नेगेटिव दायरे में यानी 3.78 फीसदी पर बनी रही, हालांकि यह गिरावट जनवरी के 4.01 फीसदी की तुलना में थोड़ी कम गंभीर थी. दिसंबर में, फ्यूल महंगाई 2.31% थी. हालांकि, महीने-दर-महीने आधार पर, फ्यूल और पॉवर इंडेक्स में 1.17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.






