Naxal-Free Dantewada: नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन के आखिरी दिन बड़ी जीत, 5 इनामी महिला नक्सलियों का सरेंडर!
दंतेवाड़ा: नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में नक्सल मुक्त बस्तर का असर दिख रहा है. नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन के अंतिम दिन दंतेवाड़ा में 5 इनामी महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. 31 मार्च 2026 को पांच इनामी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में जुड़ने का फैसला लिया. यह सरेंडर न केवल सुरक्षा बलों के प्रयासों की बड़ी सफलता है, बल्कि पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान का असर भी है.
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के नक्सलियों का सरेंडर
इस ऐतिहासिक दिन पर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े पांच प्रमुख नक्सली कैडरों ने हथियार डाले हैं. इसमें सोमे कड़ती, लखमा ओयाम, सरिता पोड़ियाम, जोगी कलमू और मोटी ओयाम शामिल हैं. सभी नक्सलियों ने माओवादी संगठन से तौबा कर लिया. इन सभी ने यह माना कि हिंसा का रास्ता अब खत्म हो चुका है और विकास की राह ही भविष्य का मार्ग है.
दंतेवाड़ा पुलिस लाइन में सरेंडर
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन कारली में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में इन नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक गौरव राय के समक्ष आत्मसमर्पण किया. इस दौरान सीआरपीएफ 111वीं वाहिनी के कमांडेंट गोपाल यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार बर्मन और नक्सल ऑप्स के एएसपी जितेंद्र कुमार खुटे भी मौजूद रहे.
सरेंडर करने वाले नक्सलियों के बारे में जानकारी
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में एक एरिया कमेटी मेंबर (ACM) और चार पार्टी सदस्य शामिल हैं. इनमें सोमे कड़ती पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि अन्य चार नक्सलियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था. इस प्रकार कुल मिलाकर इन पर लगभग 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
समाज निर्माण में सहयोग देने का संकल्प
सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने संकल्प लिया कि वे मुख्यधारा में शामिल होकर विकास, विश्वास और सुरक्षा की नीति के तहत समाज निर्माण में अहम योगदान देंगे. इस अवसर पर उन्होंने नक्सल संगठन में शामिल युवाओं से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा और रोजगार की दिशा में आगे बढ़ें.
पूना मारगेम पहल का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को सही दिशा देना है. इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं. प्रशासन का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत करना नहीं, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति और विकास स्थापित करना है- सुंदरराज पी, आईजी, बस्तर
पूना मारगेम अभियान को मिल रही सफलता
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि पूना मारगेम अभियान से बस्तर में विश्वास बहाली हुई है. इससे न केवल नक्सली संगठन कमजोर हुआ है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी प्रशासन पर बढ़ा है. आज बस्तर के दूरस्थ इलाकों में भी विकास की किरण पहुंच रही है, जो आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल देगी. नक्सल मुक्त बस्तर का यह संकल्प अब केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हकीकत बनता नजर आ रहा है. जिस बस्तर को कभी नक्सलगढ़ कहा जाता था, वही अब विकासगढ़ बनने की ओर अग्रसर है.
दंतेवाड़ा में नक्सलवाद के मोर्चे पर कामयाबी
दंतेवाड़ा में नक्सलवाद के मोर्चे पर कामयाबी मिल रही है. यहां साल 2024 से लेकर अब तक कुल 607 माओवादी कैडरों ने सरेंडर किया है. यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से निकलकर विकास और विश्वास की ओर बढ़ रहा है. इसके साथ ही एंटी नक्सल ऑपरेशन में दंतेवाड़ा में 92 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है. कुल 54 नक्सली मारे गए हैं.
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