स्मार्टफोन खरीदने का बदल गया तरीका: क्या AI फीचर्स बन गए हैं आपकी पहली पसंद? पढ़ें लेटेस्ट सर्वे रिपोर्ट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे दैनिक जीवन और टेक्नोलॉजी का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है। साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) की लेटेस्ट ‘स्मार्टफोन AI पल्स 2026’ स्टडी के अनुसार, भारत में स्मार्टफोन खरीदने के फैसलों में AI अब एक निर्णायक कारक बन गया है। इस सर्वे में 18 से 35 साल के 2000 से ज्यादा स्मार्टफोन यूज़र्स की राय ली गई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
🛡️ प्राइवेसी और भरोसा: यूज़र्स की पहली प्राथमिकता
स्टडी के मुताबिक, AI के बढ़ते दौर में भी 82 फीसदी लोग ‘भरोसे’ (Trust) को सबसे अधिक महत्व देते हैं। यूज़र्स का मानना है कि AI का अनुभव बेहतर तभी होगा जब डेटा ट्रांसपेरेंसी (Transparent Data Practice) हो। लगभग 61 फीसदी यूज़र्स का यह स्पष्ट मत है कि ‘ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग’ न केवल प्राइवेसी को मजबूत करती है, बल्कि फोन की रिस्पॉन्सिवनेस (Responsiveness) को भी बेहतर बनाती है।
🚀 AI अब सिर्फ एक फीचर नहीं, जरूरत है
CMR के नतीजों से साफ है कि AI अब महज एक वैल्यू-एडेड फीचर नहीं रह गया है। स्मार्टफोन खरीदते समय अब लोग इसे एक अनिवार्य सुविधा के रूप में देख रहे हैं:
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78% यूज़र्स: ओवरऑल परफॉर्मेंस को सबसे जरूरी मानते हैं।
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70% यूज़र्स: AI एन्हांसमेंट के साथ बेहतरीन कैमरा क्वालिटी चाहते हैं।
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59% यूज़र्स: मजबूत AI कैपेबिलिटी के आधार पर ही अपने खरीदारी के फैसले बदलते हैं।
⚙️ चिपसेट की भूमिका और Gen Z की जागरूकता
स्टडी में यह भी पाया गया कि 68 फीसदी उपभोक्ता ‘चिपसेट’ को AI परफॉर्मेंस का आधार मानते हैं, जो गेमिंग, फोटोग्राफी और बैटरी ऑप्टिमाइजेशन में मुख्य भूमिका निभाता है। खास तौर पर Gen Z यूज़र्स इस मामले में अधिक जागरूक हैं, जिनमें से 83 फीसदी लोग AI एक्सपीरियंस के लिए चिपसेट को ही सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।
📊 बदलती पसंद: AI-फर्स्ट खरीदार
सर्वे में यह भी देखा गया कि यूज़र्स का रुझान बदल रहा है:
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60% लोग: AI कैपेबिलिटी और मजबूत हार्डवेयर के बीच संतुलन (Balance) पसंद करते हैं।
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25% लोग: खुद को ‘AI-फर्स्ट’ खरीदार मानते हैं।
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15% लोग: अभी भी केवल हार्डवेयर को ही अपनी पहली प्राथमिकता मानते हैं।
77 फीसदी यूज़र्स AI पावर्ड फोटोग्राफी फीचर्स (लो-लाइट, पोर्ट्रेट) का नियमित उपयोग कर रहे हैं, जबकि 71 फीसदी लोग सर्च, ट्रांसलेशन और राइटिंग जैसे कामों के लिए जेनरेटिव AI पर निर्भर हो गए हैं।
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