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Telangana ACB Raid: HMDA के चीफ इंजीनियर के घर छापा, 100 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा

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हैदराबाद: भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में सख्त कानून और जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के बावजूद कई सरकारी अधिकारी अवैध संपत्ति जुटाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसी कड़ी में तेलंगाना से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) के चीफ इंजीनियर बी. रविंदर के पास करोड़ों की संपत्ति का बड़ा खुलासा तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने किया है।

कागजों में 9.24 करोड़, बाजार में 100 करोड़ की संपत्ति का पर्दाफाश

तेलंगाना ACB ने बी. रविंदर और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियों के अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। ACB के अनुसार, इन दस्तावेजों के आधार पर बरामद संपत्तियों का मूल्य करीब 9.24 करोड़ रुपये है, जबकि इनकी मौजूदा बाजार कीमत (Market Value) लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह भारी-भरकम संपत्ति उनकी ज्ञात आय के अनुपात से कहीं अधिक है।

10 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ चला तलाशी अभियान

ACB की सिटी रेंज-1 टीम ने मंगलवार को बी. रविंदर के आवास, कार्यालय और उनके रिश्तेदारों, करीबी सहयोगियों तथा कथित बेनामी व्यक्तियों से जुड़े कुल 10 ठिकानों पर एक साथ सघन तलाशी अभियान चलाया। इस जांच के दौरान बड़ी संख्या में संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड (Financial Records) जब्त किए गए हैं।

छापेमारी में मिली करोड़ों की जमीन, सोना-चांदी और नकदी

तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो की छापेमारी में अकूत संपत्ति सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, कोंडाकल, किस्मतपुर और पासामाला में 5 खाली प्लॉट, नरसिंगी व नानकरामगुडा में 4 आवासीय फ्लैट, कोथुर मंडल और शमशाबाद के गुडूर गांव में करीब 4 एकड़ कृषि भूमि मिली है। इसके अलावा, शंकरपल्ली मंडल के मोकिला स्थित श्रीवारी मीडोज में एक सेमी-फिनिश्ड विला और कोंडापुर (मस्जिद बांदा) में एक व्यावसायिक/आवासीय भवन का भी पता चला है। अचल संपत्ति के साथ-साथ 3.82 लाख रुपये नकद, 45.05 लाख रुपये के बैंक डिपॉजिट, 1,440 ग्राम सोने के आभूषण, 12.5 किलोग्राम चांदी और करीब 17.24 लाख रुपये मूल्य का घरेलू सामान भी जब्त किया गया है।

आय से अधिक संपत्ति (DA) का मामला दर्ज

ACB का सीधा आरोप है कि बी. रविंदर ने अपनी सरकारी सेवा के दौरान अपनी वैध आय की तुलना में कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसी पुख्ता आधार पर उनके खिलाफ ‘आय से अधिक संपत्ति’ (Disproportionate Assets – DA) का मामला दर्ज किया गया है। आपको बता दें कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसी अधिकारी की वैध आय और उसके स्वामित्व वाली संपत्तियों का बारीकी से मिलान करती है। यदि संपत्ति का कोई वैध स्रोत (Legal Source) नहीं मिलता, तो इसे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मामला माना जाता है।

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