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अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत परमहंस रामचंद्र दास के स्मृति समारोह में हुए शामिल

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अयोध्या (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को धर्मनगरी अयोध्या पहुंचे। यहां वे राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे पूज्य महंत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज के पावन पुण्य स्मृति महामहोत्सव में सम्मिलित हुए। इस दौरान संतों और प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने गो-संरक्षण, सनातन परंपराओं और राष्ट्रीय एकता जैसे समसामयिक व ऐतिहासिक मुद्दों पर बेबाकी से अपने विचार साझा किए। इसी क्रम में उन्होंने कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं और मौलवियों द्वारा गाय के संबंध में सौंपे गए ज्ञापन का उल्लेख करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

📜 ‘गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का ज्ञापन आया था, मैं भौचक्का रह गया’: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों कुछ मौलवी जगह-जगह ज्ञापन देने जा रहे थे, जिनमें से एक ज्ञापन उनके पास भी पहुंचा था।

ज्ञापन में मांग की गई थी कि विभिन्न यात्राओं के दृष्टिगत गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ज्ञापन को देखकर वे हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि गाय हमारे लिए केवल कोई साधारण प्राणी नहीं, बल्कि साक्षात गोमाता और भारत की सांस्कृतिक धरोहर हैं। सीएम ने कहा कि वे स्वयं अपने आश्रम में गोपालन करते हैं और मुख्यमंत्री के रूप में पूरे प्रदेश की गोशालाओं के माध्यम से गोवंश के संवर्धन और संरक्षण का कार्य निरंतर करवा रहे हैं।

📞 ‘मौलवियों को फोन कर पूछा— गोमाता को पशु क्यों कहा? अपनी कौम को समझाओ’

सीएम योगी ने आगे बताया कि ज्ञापन मिलने के बाद उन्होंने संबंधित मौलवियों में से कुछ को फोन लगाया और उनसे सीधा सवाल किया।

“मैंने उनसे पूछा कि एक बात बताओ, गाय तो हमारी धरोहर और माता हैं, तुमने उनके लिए ‘पशु’ शब्द का इस्तेमाल क्यों किया? अगर यही पशु शब्द मैं तुम्हारे लिए प्रयुक्त करूं तो तुम्हें कैसा महसूस होगा? इस पर उन्होंने सफाई दी कि गलती हो गई। तब मैंने कहा कि यह मात्र गलती नहीं, बल्कि शरारत है। क्या तुम हमें सिखाओगे कि गोमाता की रक्षा कैसे की जाती है? हमारे सनातन संस्कार तो यह सिखाते हैं कि थाली का पहला ग्रास गोमाता को और अंतिम स्वान (कुत्ते) को अर्पित किया जाता है। मैंने उनसे कहा कि अगर यह उपदेश अपनी कौम को देकर गो-तस्करी और गो-हत्या रुकवा देते, तो जो पुलिस बल वहां लगा है, उसे हम जनहित के अन्य कार्यों में लगा पाते।”योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री

⚔️ संभल के हरिहर मंदिर का जिक्र कर बोले सीएम— ‘हम बंटे थे, इसीलिए तो कटे थे’

देश के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के अतीत में पराधीन होने का मुख्य कारण आंतरिक फूट और विभाजन था।

उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्ष पूर्व आज के संभल में स्थित ऐतिहासिक हरिहर मंदिर को तोड़कर गुलामी का एक ढांचा खड़ा कर दिया गया था। यदि उस समय सनातन समाज एकजुट होकर उसका डटकर प्रतिकार करता, तो आगे चलकर अयोध्या में उस घटना की पुनरावृत्ति का दुस्साहस कोई विदेशी आक्रांता नहीं कर पाता। सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि हमारे पूर्वजों के पास बल और बुद्धि की कोई कमी नहीं थी, कमी केवल एकता और एक साथ कदम मिलाकर चलने की थी। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि इतिहास हमें यही सिखाता है कि जब-जब हम बंटे थे, तभी कटे थे; इसलिए राष्ट्र की सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए समाज का एकजुट रहना अनिवार्य है।

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