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IIT ISM धनबाद के शोधकर्ताओं की बड़ी उपलब्धि: विकसित किया आधुनिक 2D ऑप्टिकल टिल्ट सेंसर

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धनबाद (झारखंड): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) यानी IIT (ISM) धनबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अत्याधुनिक ऑप्टिकल टिल्ट सेंसर (Optical Tilt Sensor) विकसित किया है, जो किसी भी संरचना, इमारत या उपकरण के दो अलग-अलग दिशाओं (2D) में होने वाले सूक्ष्म झुकाव को पूर्ण सटीकता के साथ मापने में सक्षम है। तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद यह सेंसर अत्यधिक विश्वसनीय परिणाम देता है।

📜 भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से मिला आधिकारिक पेटेंट (पेटेंट सं. 599709)

इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है:

  • आविष्कारक दल: इस तकनीक को इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमितेश कुमार और उनके रिसर्च स्कॉलर रंधीर कुमार साह ने मिलकर विकसित किया है।

  • पेटेंट विवरण: भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस महत्वपूर्ण आविष्कार के लिए संस्थान को आधिकारिक पेटेंट प्रदान किया है, जिसका पेटेंट क्रमांक 599709 है।

  • समय-सीमा: डॉ. अमितेश कुमार के अनुसार, इस पेटेंट के लिए आवेदन 10 फरवरी 2025 को किया गया था, जिसे 19 अगस्त 2026 को स्वीकृति मिली। यह पेटेंट आवेदन की तिथि से आगामी 20 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।

💡 फाइबर ब्रैग ग्रेटिंग (FBG) तकनीक पर आधारित कार्यप्रणाली

यह सेंसर उन्नत ऑप्टिकल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों पर कार्य करता है:

  • सूक्ष्म ग्लास फाइबर संरचना: यह सेंसर Fiber Bragg Grating (FBG) तकनीक पर आधारित है, जिसमें अत्यंत पतले ग्लास फाइबर के भीतर विशेष सूक्ष्म पैटर्न उकेरे जाते हैं।

  • रोशनी के बदलाव से निगरानी: फाइबर से गुजरने वाली प्रकाश तरंगों में आने वाले न्यूनतम परिवर्तनों का विश्लेषण करके यह सेंसर संरचना में आए मामूली झुकाव का भी तुरंत पता लगा लेता है।

  • इनोवेटिव डिजाइन: शोधकर्ताओं ने सेंसर के ढांचे में ग्लास फाइबर से निर्मित आयताकार आर्म के साथ एक गोलाकार पेंडुलम को सुरक्षित बॉक्स के अंदर समायोजित किया है, जिससे बाहरी तापमान के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

⚡ पारंपरिक इलेक्ट्रिकल सेंसर से कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित

पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सेंसरों की तुलना में यह ऑप्टिकल सेंसर कई मायनों में उत्कृष्ट है:

  • ईएमआई (EMI) मुक्त: यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (विद्युत-चुंबकीय प्रभाव) से पूरी तरह अप्रभावित रहता है, जिससे संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्रों में सटीक रीडिंग मिलती है।

  • हल्का और टिकाऊ: इसका वजन बेहद कम है और इसे लंबे समय तक बिना किसी विशेष रखरखाव के लगातार निगरानी (Long-term Monitoring) के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

🌉 पुल, एयरोस्पेस, रोबोटिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यापक उपयोग की संभावनाएं

इस सेंसर तकनीक के अनुप्रयोग विभिन्न आधुनिक क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे:

  • सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर: बड़े रेलवे ब्रिज, फ्लाईओवर, बहुमंजिला इमारतों और बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा (Structural Health Monitoring) की रीयल-टाइम निगरानी।

  • जियो-टेक्निकल मॉनिटरिंग: भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, सुरंगों और खदानों की भूगर्भीय स्थिरता की जांच।

  • हाई-टेक इंडस्ट्री: इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, रोबोटिक आर्म्स और एयरोस्पेस उपकरणों के संवेदनशील घटकों के सटीक संचालन में।

👨‍🏫 डॉ. अमितेश कुमार: फोटोनिक्स और फाइबर ऑप्टिक्स के विशेषज्ञ

डॉ. अमितेश कुमार वर्ष 2011 से IIT (ISM) धनबाद में फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं और वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर सेवाएं दे रहे हैं। वे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं IEEE और OPTICA के सीनियर मेंबर हैं। उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट, फाइबर ऑप्टिक सेंसर, माइक्रोवेव फोटोनिक्स और आगामी 5G/6G की रेडियो-ओवर-फाइबर (RoF) तकनीक शामिल हैं।

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