Local & National News in Hindi

दुमका जिला संयुक्त औषधालय की बदहाली: जर्जर छत, न वॉशरूम न पानी; खौफ के साए में काम कर रहा स्टाफ

31

दुमका (झारखंड): सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में अक्सर मरीजों को इलाज न मिलने की बातें सामने आती हैं, लेकिन दुमका का जिला संयुक्त औषधालय एक ऐसा अस्पताल है जहां तैनात स्टाफ खुद हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका से डरा-सहमा रहता है।

यूनानी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धतियों से लोगों के इलाज के लिए स्थापित यह औषधालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अस्पताल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। छतों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है और कंक्रीट के भीतर से लोहे की छड़ें साफ नजर आ रही हैं, जिससे कभी भी कोई गंभीर अनहोनी घट सकती है।

🚾 अस्पताल में वॉशरूम और पानी तक नहीं, महिला कर्मचारियों की बढ़ीं मुश्किलें

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और स्टाफ की परेशानी:

  • शौचालय का अभाव: अस्पताल परिसर में एक भी क्रियाशील वॉशरूम नहीं है, जिसके कारण सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ड्यूटी करने वाले स्टाफ को बाहर जाना पड़ता है। खासकर महिला कर्मियों को अत्यधिक असहजता और परेशानी झेलनी पड़ रही है।

  • टपकती छतें: बारिश के दिनों में छत से लगातार पानी टपकता है। कंप्यूटर ऑपरेटर ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और जरूरी फाइलों को प्लास्टिक या सुरक्षित कोनों में ढककर बचाना पड़ता है।

  • खिड़कियों में शीशे नहीं: अस्पताल में न तो पीने के पानी की मुकम्मल व्यवस्था है और न ही खिड़कियों में शीशे लगे हैं, जिससे धूल और मौसमी मार सीधे कमरों में पहुंचती है।

🩺 यूनानी और आयुर्वेदिक डॉक्टर नदारद, सिर्फ एक होम्योपैथिक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल

डॉक्टरों की भारी कमी और मरीजों की स्थिति:

  • विशेषज्ञों का अभाव: इस केंद्र में यूनानी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक तीनों विधाओं के विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में यूनानी और आयुर्वेदिक का एक भी चिकित्सक पदस्थ नहीं है।

  • होम्योपैथिक डॉक्टर का बयान: अस्पताल में पदस्थ एकमात्र होम्योपैथिक डॉक्टर सुजीत कुमार ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 30 से 35 मरीज इलाज के लिए आते हैं।

  • सुविधाएं बढ़ें तो मिले लाभ: डॉ. सुजीत का मानना है कि यदि अस्पताल भवन की मरम्मत कराई जाए और तीनों पद्धतियों के चिकित्सक उपलब्ध कराए जाएं, तो यहां आने वाले मरीजों की संख्या में भारी इजाफा होगा।

🏙️ शहर के बीचों-बीच स्थित अस्पताल की उपेक्षा, तत्काल जीर्णोद्धार की मांग

प्रशासनिक उदासीनता और स्थानीय मांग:

  • शहर के मध्य उपेक्षा: जिला संयुक्त औषधालय दुमका शहर के मुख्य हिस्से में स्थित है, इसके बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा इसकी सुध न लेना चिंता का विषय है।

  • जीर्णोद्धार की आवश्यकता: कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि किसी बड़ी दुर्घटना के होने से पहले भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए और बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.